आर्थिक संकट से जूझ रहे निजी स्कूलों की भी सुने सरकार
आर्थिक संकट से जूझ रहे निजी स्कूलों की भी सुने सरकार
राजस्थान

आर्थिक संकट से जूझ रहे निजी स्कूलों की भी सुने सरकार

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उदयपुर, 23 जुलाई (हि.स.)। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण निजी स्कूल में अभिभावकों द्वारा फीस जमा नहीं कराने का असर स्कूल प्रबंधनों पर भी पड़ा है। स्कूल प्रबंधन नए सत्र तो क्या पिछले सत्र की बकाया फीस से भी महरूम हो गए हैं। ऊपर से शिक्षामंत्री के बयान के बाद निजी स्कूल पिछले सत्र की बकाया फीस का तकाजा भी नहीं कर पा रहे हैं। इससे निजी स्कूल संचालक परेशान हैं और उनमें रोष भी है। इस पीड़ा को लेकर उदयपुर में निजी स्कूल संचालकों ने गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि 22 मार्च से लॉकडाउन होने के कारण इस साल कई निजी स्कूल वार्षिक परीक्षाएं भी नहीं करा पाए। इस कारण से वह लगभग 70 प्रतिशत स्कूल फीस अभिभावकों से प्राप्त ही नहीं कर पाए और अभिभावकों से शेष स्कूल फीस जमा करवाने के लिए नहीं कहा जा सकता। शिक्षा बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति की प्रवक्ता हेमलता शर्मा ने बताया कि फीस मिले या न मिले, स्कूलों को तो प्रतिमाह अपने स्कूल भवन का किराया देना ही है, प्रतिमाह स्टाफ को वेतन देना ही है, बैंक से स्कूल के लिए जो लोन लिया है उसकी किस्त देनी ही है, बिजली-पानी का प्रतिमाह बिल जमा कराना ही है, स्कूल को वृत्तिकर धारा 27-28 के चालान, ऑडिट आदि करवाने ही हैं, नए सत्र की व्यवस्थाएं करनी ही हैं, इसके साथ-साथ अपने परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्थाएं तो हैं ही। उन्होंने कहा कि इन्हीं गंभीर समस्याओं को लेकर राजस्थान के सभी निजी स्कूल संचालकों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख है कि जब तक कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल नहीं खुलते तब तक प्रतिमाह निजी स्कूल संचालकों, स्कूल स्टाफ को वेतन व अन्य सहयोग राशि सरकार प्रदान करे। कोरोना संकटकाल में स्कूल न खुलने तक सरकारी स्कूलों की तरह ही निजी स्कूलों में पढ़ रहे सभी छात्रों की लॉक डाउन अवधि की स्कूल फीस का भुगतान सरकार करे, इससे अभिभावकों का बोझ कम हो जाएगा और निजी स्कूलों की परेशानी भी दूर हो जाएगी। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल / ईश्वर-hindusthansamachar.in