आरपीएस कर रहे हैं आरोपित को बचाने का प्रयास, डीजीपी इन्हें करें तत्काल निलंबित
आरपीएस कर रहे हैं आरोपित को बचाने का प्रयास, डीजीपी इन्हें करें तत्काल निलंबित
राजस्थान

आरपीएस कर रहे हैं आरोपित को बचाने का प्रयास, डीजीपी इन्हें करें तत्काल निलंबित

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जयपुर, 02 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पीडिता की ओर से दुष्कर्म का स्पष्ट आरोप लगाने के बावजूद सह आरोपित को केस से निकालने पर तिजारा पुलिस उपाधीक्षक कुशाल सिंह को तत्काल निलंबित करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने डीजीपी को कहा है कि जांच अधिकारी के निलंबन के बाद उनके खिलाफ कडी कार्रवाई करने के लिए विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। न्यायाधीश एसपी शर्मा ने यह आदेश आरोपी मुनफैद की द्वितीय जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पीडिता ने अपने बयान में याचिकाकर्ता सहित एक अन्य तौफिक के खिलाफ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। पुलिस मामले में उचित जांच नहीं कर रही है और मामले में सिर्फ याचिकाकर्ता को आरोपित बना रही है। वहीं राज्य सरकार की ओर से रिपोर्ट पेश कर बताया कि पुलिस ने तौफिक को क्लीन चिट देते हुए एफआर पेश कर दी है। इस पर अदालत ने मामले में जांच अधिकारी को पेश होने के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान तिजारा सीओ कुशाल सिंह अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि तौफिक की मोबाइल लोकेशन हरियाणा के अलग-अलग जगहों की आ रही थी। इसलिए माना गया कि वह मामले में शामिल नहीं था। इस पर कोर्ट ने कहा कि पीडिता ने अपने बयानों में तौफिक पर भी स्पष्ट आरोप लगाया है। इसके अलावा पीडिता ने बयानों में अपनी उम्र 14 साल बताई है, लेकिन आईओ ने उसकी उम्र 19 साल मान ली। अदालत ने माना कि जांच अधिकारी आरोपी को बचाकर गंभीर अपराध कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल निलंबित करने के लिए डीजीपी को आदेश भेजा जा रहा है। गौरतलब है कि अलवर के खुशखेडा थाना इलाके से गत वर्ष नाबालिग पीडिता का अपहरण और दुष्कर्म करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। हिन्दुस्थान समाचार/पारीक/संदीप-hindusthansamachar.in