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पंजाब

(अपडेट) पंजाब विधानसभा में अकाली दल ने किया राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध

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- कृषि कानूनों को वापस लेने और कोरोना से हुए राज्य को नुकसान का किया जिक्र चंडीगढ़, 01 मार्च (हि.स.) । पंजाब विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेताओं ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान जमकर हंगामा किया। अकाली दल के विधायकों ने राज्यपाल के खिलाफ ''गो बैक'' के नारे लगाए। अकाली दल के सदस्यों ने राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के अभिभाषण के दौरान भी नारेबाजी जारी रखी। 143 बिन्दुओं वाले राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के अभिभाषण में कहा गया है कि केंद्र द्वारा तीन कृषि अधिनियम का लागू होना सहकारी संघवाद के सिद्धांतों के खिलाफ है। सरकार ने केंद्र सरकार से इन कानूनों को वापस लेने की मांग की है। राज्यपाल के अभिभाषण में कोरोना संकट और उससे राज्य को हुए नुकसान, कोरोना का उपचार और लोगों को दी राहत, विधवा व वृद्धा पेंशन की राशि बढ़ाने का जिक्र है। किसान आंदोलन के दौरान कोरोना के बढ़ते खतरे और उस पर लोगों की चिंता, तीन कृषि कानूनों के चलते किसान आंदोलन से पंजाब को होने वाले संभावित नुकसान, किसानों को मुफ्त बिजली देने, आगामी वर्ष 2021-22 में ऋण माफी योजना के चलते 2.85 लाख भूमिहीन मजदूरों को 520 करोड़ रुपये की कर्ज़ माफी, राज्य में नशा विरोधी अभियान के तहत 1785 किलोग्राम हेरोइन बरामद करने, नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने, युवाओं को निशुल्क स्मार्ट फोन आवंटित करने की योजना के अधीन इस वर्ष दो लाख मोबाइल आवंटित करने, शिक्षा सुधार करने, पत्रकारों को दुर्घटना बीमा योजना में 5952 पत्रकारों को शामिल करने समेत अनेक मामले शामिल हैं । राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के अभिभाषण का विरोध करने को लेकर विपक्ष राज्यपाल "गो बैक" के नारे लगाने के बाद उसी रास्ते पर डटा रहा, जहां से राज्यपाल को वापस जाना था। सदन में विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान खूब हो हल्ला मचाये रखा । इसके कारण सदन में कुछ भी ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था। इस पर राज्यपाल ने हालात को देखते हुए अपना अभिभाषण बीच में ही रोक दिया। इसके बाद अकाली दल, आम आदमी पार्टी के विधायक उस मार्ग पर आकर नारेबाजी करने लगे, जहां से राज्यपाल को वापस जाना था। इस स्थिति को देखते हुए वहां पर बड़ी संख्या में मार्शल तैनात कर दिए गए थे। इसके उपरांत राज्यपाल को अन्य द्वार से निकालने के लिए उनका वाहन दूसरी ओर ले जाया गया। जब विपक्ष को इसका अहसास हुआ तो विपक्षी दल के सदस्य वहां से चले गए। इसके बाद में राज्यपाल को उसी मार्ग से बाहर भेजा गया। हिन्दुस्थान समाचार/ नरेंद्र जग्गा/रामानुज