पंजाब में फिर से रोज़ाना 8 घंटे का कर्फ्यू , बड़े नगरों में दो दिन की नज़रबंदी
पंजाब में फिर से रोज़ाना 8 घंटे का कर्फ्यू , बड़े नगरों में दो दिन की नज़रबंदी
पंजाब

पंजाब में फिर से रोज़ाना 8 घंटे का कर्फ्यू , बड़े नगरों में दो दिन की नज़रबंदी

news

चंडीगढ़, 14 अगस्त ( हि स ): : पंजाब में कोरोना मामलों में हो रही वृद्धि और राज्य के अंदर आने वाले कुछ हफ़्तों में इसके शिखर छूने की चिंता के दरमियान पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज महामारी के फैलाव पर काबू पाने के लिए अन्य कदमों के साथ-साथ रात 9:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक सभी शहरों में कर्फ्यू लगाने का ऐलान किया है। बड़े शहरों की सैक्टर अधारित बाँट और हर सैक्टर में स्वास्थ्य विभाग की टीमों के संपर्क में आए व्यक्तियों का पता लगाने में सहायता के लिए नोडल अधिकारी मुख्य मंत्री द्वारा ज़रूरी सेवाओं के अलावा लोगों को बिना ज़रूरत आने-जाने के और सामाजिक मेल-मिलाप रोकने के लिए लुधियाना, पटियाला और जालंधर में अगले पखवाड़े के लिए हफ्ते के अंतिम दिनों (शनिवार और रविवार) के दौरान घर के अंदर रहने (स्टे ऐट होम) का ऐलान किया, जिसके बाद स्थिति का पुन: जायज़ा लिया जाएगा। इस अहम फ़ैसले के अनुसार हर मैरिज पेलेस, रैस्टोरैंट, दफ़्तर जहाँ 10 से ज्य़ादा लोग इकठ्ठा होते हैं, की तरफ से एक कोविड निगरान तैनात किया जाएगा, जिससे मास्क पहनने, कीटाणू रहित बनाने और सामाजिक दूरी को अमल में लाने को यकीनी बनाया जाए। यह मुख्यमंत्री द्वारा साप्ताहिक फेसबुक प्रोग्राम ‘कैप्टन को सवाल’ के दौरान बताया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि टीमें इन स्थानों का दौरा करके जाँच-पड़ताल करेंगी और उल्लंघन करने वालों के खि़लाफ़ कार्यवाही की जाएगी। इससे आगे, मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक स्तर पर ज़्यादा लोगों के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के टैस्ट आने वाले हफ्तों में किए जाएंगे और स्वास्थ्य, पुलिस और अन्य विभागों के कोरोना पर जीत पाने वालों (जो ठीक हो चुके हैं) की प्रथम पंक्ति में ड्यूटी लगाई जाएगी। यह दिशा-निर्देश मामलों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए दिए गए हैं। पिछले 7 दिनों के दौरान प्रतिदिन औसतन 1000 केस रिपोर्ट हो रहे हैं। पिछले हफ्ते ज़्यादातर केस लुधियाना, पटियाला, जालंधर, अमृतसर और मोहाली से सामने आए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड से हो रही मौतों की बढ़ रही दर बीमारी से प्रभावित होने वालों की जल्द टेस्टिंग और 72 घंटों में अस्पताल को इलाज के लिए रिपोर्ट किए जाने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि जानों को सुरक्षित रखना है तो इलाज निश्चित समय के दरमियान शुरू होना चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा कि, ‘‘कोई बात नहीं ’’ या ‘‘मौसम की बात है ’’ जैसी बातों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि, ‘‘ख़ुद डॉक्टर न बनो, बीमारी की पहचान और इलाज की सलाह का काम डॉक्टरों के लिए छोड़ दो।’’ हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र जग्गा / संजीव-hindusthansamachar.in