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महाराष्ट्र

पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन से मिल रही मदद से लोगो के सपनों की उड़ान को मिले पंख

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मुंबई,19 फरवरी (हि. स.)। सरकारी योजनाओं में अड़ंगा लगाकर दुष्प्रचार करने वालों की कमी नहीं है, लेकिन इसकी मदद से जिंदगी का नक्शा बदल देने वाले चंद ही लोग हैं। इसी दिशा में पालघर के रहने वाले आदिवासी भी अनूठी मिशाल पेश कर रहे है। पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जाने वाली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए जारी भूमि-अधिग्रहण का विरोध अब थमता दिख रहा है। यहां के कई आदिवासी परिवार सहमति से परियोजना के लिए अपनी जमीन देने के लिए सामने आ रहे है। और सरकार से मुआबजे के तौर पर मिलने वाली मदद से अपने सपनो को साकार करते देखे जा रहे है। राजेश कहते है, कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना के मार्ग में आने वाले शहरों को बेहतर और सुगम साधन उपलब्ध होगा। जिससे पालघर के ग्रामीण इलाकों को भी विकसित होने का एक मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रो, ऐतिहासिक स्थानों और जिले में स्थित कई पर्यटन स्थलों पर आने वाले स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। जिससे स्थानीय लोगो की आय तो बढ़ेगी पालघर को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान भी मिलेगी। बच्चों की उच्च शिक्षा का सपना होगा साकार- मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करने वाली सुधा वायडा कहती है,कि उच्च शिक्षा की लागत में दिनोंदिन होती बढ़ोतरी की वजह से बच्चों को आगे पढ़ाने में मुश्किल हो रही थी। लेकिन बुलेट ट्रेन परियोजना से मिली मदद से अब मैं उन्हें आगे पढ़ाना चाहती हु। जिससे बच्चों की उच्च शिक्षा का सपना साकार होगा। बारिश में टपकती थी छत,पक्के घर का सपना होगा पूरा- आदिवासी परिवार से आने वाले रामू बालू घोरखना कहते है, कि वर्षो पहले पिता ने घर बनाया था। जो अब जर्जर हो चुका है। जिससे उन्हें और उनके परिवार को बारिश, गर्मी और सर्दी के मौसम परेशानियों का सामना करना पड़ता था।रामू ने बताया कि सपना था कि उनका भी एक पक्का घर हो। उन्होंने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना में उनकी जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा गया है। और उसकी एवज में मिली मदद से जल्द ही उनके पक्के घर का सपना पूरा होने वाला है। रामू ने कहा कि सरकार से सहायता नहीं मिलती तो वह जिंदगी भर पक्का मकान नहीं बना पाते। रामू बताया कि उन्हें करीब दस लाख रुपये बुलेट ट्रेन परियोजना से मिलेंगे। जिससे वह अपने परिवार के लिए एक पक्का घर बनाएंगे और जीविका चलाने के लिए एक छोटी सी दुकान डालेंगे। परियोजना से मिली मदद से करेंगे सब्जियों की खेती विष्णु वायडा को परियोजना से प्रभावित होने पर करीब 37 लाख रुपये मिलेंगे। रकम अभी मिली नही है, लेकिन वह भविष्य को लेकर आशावान है। वायडा ने कहा कि उसके बेटे अजय का सपना था कि वह आधुनिक तरीके से सब्जियों की खेती करें। उन्होंने बताया कि पैसे मिलने के बाद खेती में सिंचाई जैसी सुबिधा हो जाएगी। और सब्जियों को उगा कर मुंबई में बेच कर एक अच्छी आय प्राप्त करेंगे। बुलेट ट्रेन परियोजना से प्रभावित जेठिया चंद्रा वायडा ने खुशी-खुशी अपनी जमीन देते हुए कहा कि उन्हें परियोजना से साढ़े सात लाख रुपये मिलने वाले है। जिससे वह अपना घर बना कर गांव में एक चक्की लगाएंगे। जिससे उनकी जीविका चल सके। इसी तरह सचिन दिलीप वायडा को परियोजना से प्रभावित होने की एवज में करीब 14 लाख रुपये मिलेंगे। उनका सपना है, कि वह इन पैसों से बहन को उच्च शिक्षित करेंगे और छोटे भाई विशाल को बुलेट ट्रेन परियोजना की ओर से युवाओं की दी जा रही स्वरोजगार के ट्रेनिंग में भेजेंगे। जिससे वह भी खुद अपनी जीविका चला सके। मुआबजे के साथ परिवार के एक सदस्य को दी जाए नौकरी सामाजिक कार्यकर्ता वैभव पाटिल ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना में लोगो का घर, खेत और दूसरी सारी ज़मीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। परियोजना से प्रभावित परिवारों को मुआबजे के परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाए। एनएचएसआरसीएल की प्रवक्ता सुषमा गौर ने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों की मदद से एनएचएसआरसीएल शीघ्र मुआवजा और किसी भी कठिनाइयों के त्वरित समाधान के साथ भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को जितना संभव हो सके उतना आसान बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा,एनएचएसआरसीएल की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया मुआवजे,आर एंड आर सहायता आदि के भुगतान तक सीमित नहीं है इसमें कौशल विकास, आय बहाली के लिए प्रशिक्षण, वृद्धि और आजीविका बहाली का विकास और परियोजना प्रभावित लोगो के लिए आय सृजन के अवसर की व्यवस्था करना भी शामिल हैं। हिन्दुस्थान समाचार/योगेंद्र

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