उज्जैन: पांच डॉक्टर्स के भरोसे चल रहा जिला अस्पताल
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उज्जैन: पांच डॉक्टर्स के भरोसे चल रहा जिला अस्पताल

पीएम करे या एमएलसी केस के दस्तावेज तैयार करें...मरीज तो देख ही नहीं पा रहे... उज्जैन,22 मई(हि.स.)। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल,जिला अस्पताल के हालात इन दिनों बहुत खराब है। यहां पर डॉक्टर्स की बहुत कमी है। जितने हैं,उनके पास इतने काम हो गए हैं कि वे दूसरे कामों को करने के चक्कर में मरीज ही नहीं देख पा रहे हैं। दरअसल, ऐसा नहीं है कि इस बात की जानकारी प्रशासन या सिविल सर्जन को नहीं है। लेकिन ये भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं बचे हैं। इनके अनुसार कोरोनाकाल में कोरोना का उपचार सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। लेकिन शेष बीमारियों के मरीज कहां जाए और क्या करें,इसका जवाब मांग रहे हैं वे गरीब लोग जो रोजाना सुबह जिला अस्पताल पहुंच जाते हैं। इस संबंध में चर्चा करने पर आरएमओ डॉ.धवन ने बताया कि जिला अस्पताल के 35 डॉक्टर्स को कोविड सेंटर्स में लगा दिया गया है। इस समय जिला अस्पताल में डॉक्टर्स की बहुत कमी है। केवल पांच डॉक्टर्स के भरोसे यह चल रहा है। यह स्थिति है अभी.... * 14 डॉक्टर्स ट्रेनिंगवाले थे,इनकी ड्यूटी कोविड सेंटर्स पर लग गई। * 01 डॉक्टर हड्डी रोग के थे,वे पीटीएस में ड्यूटी दे रहे हैं। * ये और चरक तथा माधवनगर में कुल 35 डॉक्टर अटैज्ड हैं। * हार्ट अटेक के मरीज भी आते हैं आधी रात को,देखे कौन ठप हो जाएगा पूरा सिस्टम यहां पेरा मेडिकल स्टॉफ से चर्चा करने पर अनऑफिशियली उन्होंने बताया कि- जिला अस्पताल पूरी तरह से कोलेप्स हो जाएगा। यहां अब डॉक्टर्स है नहीं। हम मरीज का कैसे उपचार करें। बताते तो डॉक्टर्स ही हैं। गरीब लोग यहां आते हैं उपचार करवाने। कोई मिलता नहीं है। वे लाचार होकर इधर-उधर देखते हैं। कुछ गालियां दे जाते हैं। वहां वे प्रसन्न हैं.......? यहां कार्यरत जूनियर डॉक्टर्स के अनुसार हमारे सभी सीनियर्स को फोन लगाते हैं तो वे बताते हैं कि हमें कोविड सेंटर्स आदि जगहों पर लगा दिया गया है। यहां कोई काम तो है नहीं। बैठकर पूरी करते हैं अपनी ड्यूटी। हम तो प्रसन्न हैं। जिला अस्पताल में रोजाना बेकार की बातें चलती थीं। यहां कोई नहीं आता डिस्टर्ब करने। हिन्दुस्थान समाचार/ललित ज्वेल

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