गाय के दूध गोबर में कीटाणुओं से लड़ने की अदभुद क्षमता

गाय के दूध गोबर में कीटाणुओं से लड़ने की अदभुद क्षमता
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शरीर में बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता हरदा, 06 मई (हि.स.)। गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है जो ऑक्सीजन देने के साथ-साथ ऑक्सीजन लेता है, जिससे वातावरण में ऑक्सीजन की कमी नहीं हो पाती है। गाय के दूध में रेडियो विकिरण क्रिया होती है जिससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, दिल की बीमारी रोकने की क्षमता होती है, यादाश्त बढ़ाने के साथ-साथ रोग के कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता अधिक होती है। गोबर में हैजा जैसी बीमारी से लड़ने की अदभुद क्षमता होती है, क्षय रोग से मुक्ति मिलती है । गोबर की गंध से क्षय रोग से निजात मिलने के साथ-साथ अन्य घातक बीमारियों से मुक्ति मिलती है। यह कहना है ब्रजेश रिछारीया का। उन्होंने कहा है कि गाय के गोबर से टीवी व मलेरिया जैसी घातक बीमारी से मुक्ति मिलती है, शोध से जो रिपोर्ट आई है उस से पता चला है कि मलेरिया जैसी बीमारी का इलाज गाय के गोबर से हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार गाय का गोबर एक रामबाण औषधि है जिससे तमाम बीमारियों से मुक्ति मिलने के साथ-साथ रोग से लड़ने की शरीर को ताकत मिलती है। श्री रिछारीया ने बताया कि गाय के एक तोला घी से हवन करने पर एक टन ऑक्सीजन बनता है जो ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के साथ-साथ शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करता है। इससे लोगों को काफी राहत मिलती है गाय के दूध से कैरोटीन नामक पदार्थ पाया जाता है, जिससे तमाम बीमारियों का इलाज आसानी से हो जाता है। गाय के गोबर से बायोगैस की सुविधा है जिससे भोजन बनाने के साथ-साथ रोशनी आदि की व्यवस्था होती है । कंपोस्ट खाद बनती है जिससे पैदावार अच्छी होती है, पूरे देश में गाय की संख्या लगभग 7 करोड़ 60 लाख है जिससे 14 करोड़ टन दूध की प्राप्ति होती है। गाय को पशुधन का दर्जा दिया गया है गाय की सेवा करने से अनेक लाभ होते हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्र के अनुसार गाय की सेवा से अक्षय पुण्य मिलता है जिस घर में गो ग्रास निकाला जाता है उस घर में कभी अन्न की कमी नहीं पड़ती है गाय का दूध हर प्रकार से लाभदायक हैं। ब्रजेश रिछारीया का कहना है कि गाय के गोबर से काष्ठ उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है जो लकड़ी का एवं बेहतर विकल्प सिद्ध हो रहा है। निकट भविष्य में लकड़ी की कमी भरपाई गाय के गोबर से होगी, जंगल का सफाया हो रहा है कि लकड़ी की उपलब्धता कम हो रही है ऐसी स्थिति में गाय का गोबर निकट भविष्य में लकड़ी का काम करेगा । भोजन पकाने के साथ-साथ शव जलाने का काम भी किया जा रहा है। गौशालाओं में बायोगैस गोबर काष्ठ आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे ऑक्सीजन की पूर्ति हो सके। वहीं, छीपानेर के सरपंच मंगलसिंह पवार का कहना है कि गाय की सेवा सर्वोत्तम सेवा है, इससे अक्षय पुण्य मिलता है । इस लोक, परलोक और ब्रह्म लोक तीनों गाय की सेवा से सुधरता है, शास्त्र के अनुसार गाय की सेवा के अनेक फायदे हैं। युवराज अभिजीत शाह का कहना है कि गाय का राष्ट्रीय पशु का दर्जा देकर बढ़ावा दिए जाने की सख्त जरूरत है। इस संबंध में सभी को एकमत होकर राष्ट्रीय पशु घोषित कराने की दिशा में पहल की जानी चाहिए । इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी को एकजुटता दिखाना चाहिए, तभी गोवंश की रक्षा की जा सकती है । इनका कहना है प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप गौशालाओं को समृद्ध बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा । गायों की देखभाल करके गौशालाओं में बायोगैस, गोबर काष्ठ, कंपोस्ट खाद आदि उद्योग को बढ़ावा देकर आय के स्रोत विकसित किए जाएंगे, जिससे गौशालाओं का बेहतर संचालन हो सकेगा। डॉ रामकुमार शर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत हरदा। हिन्दुस्थान समाचार/प्रमोद सोमानी