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मध्य-प्रदेश

सिविल सर्जन की नेगेटिव रिपोर्ट ने सीएमएचओ के षड्यंत्र की खोली पोल

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अशोकनगर,14 अप्रैल (हि.स.)। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ.एसएस छारी को जबरन कोरोना पॉजीटिव बताकर क्वारंटाइन करवाने वाले सीएमएचओ डॉ.हिमांशु शर्मा के षड्यंत्र की पोल मंगलवार देर शाम आई कोरोना पॉजीटिव मरीजों की सूची ने खोल दी है। डॉ. छारी से वैमनस्य रखने वाले सीएमएचओ ने डॉ. छारी की एंटीजन कार्ड टेस्ट की दूसरी रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी इस बात पर अड़े रहे कि डॉ. छारी कोरोना पॉजीटिव हैं। जबकि छारी में न तो कोई लक्षण नजर आ रहे थे और न हीं उनकी एंटीजन कार्ड टेस्ट रिपोर्ट पॉजीटिव थी। खुद डॉ. छारी बार-बार कह रहे थे कि वह पॉजीटिव नहीं हैं और न ही उनमें कोई लक्षण हैं। डॉ. छारी बता चुके थे कि वे अपने परिजनों के साथ भोपाल गए थे इस कारण वहां से लौटने के बाद एक जिम्मेदार डॉक्टर व नागरिक का कर्तव्य निभाते हुए उन्होंने सबसे पहले अपनी एंटीजन कार्ड टेस्ट कराया। जिसमें पहले टेस्ट में वह पॉजीटिव आए। डॉ. छारी के मुताबिक चूंकि इस किट की क्वालिटी घटिया थी इस कारण मैंने दूसरी जांच कराई। जिसमें वह निगेटिव आए पर सीएमएचओ को जैसे ही सिविल अस्पताल में यह जानकारी लगी तो आपदा में मौका देखते हुए उन्होंने इसका न केवल प्रचार किया बल्कि अगले दिन खुद जिला अस्पताल में पहुंचकर पत्रकारों के बीच पहली टेस्ट किट को विजेता के अंदाज में हवा में लहराते हुए कहा कि डॉ. छारी पॉजीटिव हैं। बताया जाता है कि तीसरी टेस्ट रिपोर्ट में भी छारी कोरोना नेगेटिव पाए गए थे इसके बाद भी सिविल अस्पताल का चार्ज लेने कथित मंशा से उनके निवास को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करते हुए उन्हें जबरन होम क्वारंटाइन कर दिया गया। ऐसा होते ही सीएमएचओ ने डॉ. जेआर त्रिवेदिया को सिविल सर्जन का प्रभार दे दिया जबकि डॉ. छारी ने अपना प्रभार अस्पताल के मैनेजर डॉ. प्रशांत दुबे को दिया था। डॉ. छारी को कोरोना पॉजीटिव बताने वाले सीएमएचओ डॉ. हिमांशु शर्मा की कार्यप्रणाली शुरू से मामलों को सुलझाने के बजाए उलझाने वाली रही हैं। अपनी महत्वकांक्षाओं के चलते बीना से अशोकनगर आए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शर्मा ने दांव-पेंच चलाते हुए पहले जिला अस्पताल के सिविल सर्जन बन गए और फिर गोटियां जमाते हुए उन्होंने सीएमएचओ की कुर्सी भी कब्जा ली लेकिन उनका मोह सिविल सर्जन की कुर्सी से भी छूटा नहीं था सूत्रों के मुताबिक इसके लिए उन्होंने अपने किसी खास को सिविल सर्जन बनाने के लिए ही यह षड्यंत्र रचा और इसमें काफी हद तक सफल भी रहे लेकिन ग्वालियर से आई आरटी पीसीआर की रिपोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। अब देखना है यह कि छारी को फिर से फसाने के लिए डॉ. हिमांशु शर्मा क्या नई चाल चलते हैं या फिर फिर गलती के बाद वे ऐसी हरकतों से बाज आएगें। हिन्दुस्थान समाचार/ देवेन्द्र ताम्रकार