महाकाल मंदिर के समीप खुदाई में मिले पुरावशेष अन्न क्षेत्र में रखे गए

महाकाल मंदिर के समीप खुदाई में मिले पुरावशेष अन्न क्षेत्र में रखे गए
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उज्जैन, 09 जून (हि.स.)। महाकाल मंदिर में हाल ही में खुदाई के समय जो पुरावशेष मिले हैं, वे गुप्त काल और परमार काल के हैं। ऐसे करीब 20 पुरावशेष जोकि इतिहास बताते हैं और जिनका अधिकांश हिस्सा साबुत है, उन्हें जेसीबी की मदद से डम्फर में रखकर अन्न क्षेत्र में पहुंचवा दिया गया है ताकि मंदिर समिति भविष्य में जो संग्रहालय बनाएगी,वहां इन्हे प्रदर्शित किया जा सके। जो सिद्ध करेंगे कि यह मंदिर कितना पुराना और किस काल का है? पुरातत्वविद् शुभम केवलिया ने हिस को बताया कि कल उनकी उपस्थिति में करीब 20 पुरावशेष महाकाल अन्न क्षेत्र में पहुंचवाए गए। छोटे अवशेष एवं अत्यधिक नष्ट हो चुके अवशोषों को वहीं छोड़ दिया गया। उन्होने बताया कि गुप्तकाल के समय की ईटें भी खुदाई में मिल रही है। जिन्हे उन्होने सुरक्षित रखवाया है। जोकि दावा करती है कि परमार काल के पूर्व गुप्तकाल का राज्य अवंतिका नगरी में था और महाकाल मंदिर उस समय भी था। अब नीचे की खुदाई में लगातार ईटें ही मिलेंगी। जितने पुरावशेष मिले,वे करीब 20 फिट की गहराई तक मिल चुके। मंदिर किस देवी-देवता का था:बताना मुश्किल महाकाल मंदिर के समीप भू गर्भ से मिले इन अवशेषों में मंदिर के स्तंभ,गर्भगृह की छत आदि पुरावशेष मिले लेकिन कोई देवी या देवता की प्रतिमा नहीं मिली। शिखर का आंवला मिला,वहीं छोटे शिखर भी मिले। लेकिन इनसे यह सिद्ध नहीं होता कि ये देवी का मंदिर था या देवता का। या तो ये पुरावशेष गर्भ में कहीं दबे हैं या फिर आक्रांताओं ने प्रतिमाओं को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था,जिसके कारण मंदिर के शेष अवेशष मिल गए लेकिन प्रतिमा नहीं मिली। शुभम केवलिया के अनुसार जब तक देवी या देवता के मंदिर संबंधित कोई प्रमाण नहीं मिले,बता ही नहीं सकते कि मंदिर किन देवता का था? आगे भी रखना होगी सावधानी मंदिर में खुदाई को लेकर आगे सावधानी रखना होगी। कर्मचारियों को सूत्रों का पुष्ट दावा है कि यह सावधानी लाकडाउन के समय नहीं रखी गई ओर कुछ बड़े अवशेष जेसीबी से टूट गए। अब यहां पर पुरातत्वविद् की मानीटरिंग बॉडी बैठाना होगी। साथ ही ठेकेदार को निर्देश देना होंगे कि कोई भी पुरावशेष निकले,तत्काल सूचित करें। हिन्दुस्थान समाचार/ललित ज्वेल/राजू