एसडीएम कार्यालय में हुए त्यागपत्र देने वाले 16 जनशिक्षकों के बयान

एसडीएम कार्यालय में हुए त्यागपत्र देने वाले 16 जनशिक्षकों के बयान
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गुना, 16 जून (हि.स.) । अपने विभाग के अधिकारियों से प्रताड़ित होकर जनशिक्षक द्वारा आत्महत्या किये जाने के मामले में जांच शुरू हो गयी है। बुधवार को एसडीएम कार्यालय में इस्तीफा देने वाले सभी 16 जनशिक्षकों के बयान दर्ज किये गए। एसडीएम अंकिता जैन और जिला शिक्षा अशिकारी अशोक पंवार ने सभी के बयान लिए। इस दौरान जनशिक्षकों ने कहा कि जब तक उनके साथी जनशिक्षक को न्याय नहीं मिलेगा तब तक वो चुप नहीं बैठेंगे। इससे पूर्व मंगलवार को इन सभी 16 जनशिक्षकों को जांच के लिए नियुक्त टीम द्वारा नोटिस जारी कर अपने बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया। इसमें उन सभी जनशिक्षकों को बुलाया गया जिन्होंने तत्कालीन प्रभारी बीआरसीसी शम्भू सोलंकी पर आरोप लगाते हुए सामूहिक त्यागपत्र दे दिया था। जनशिक्षक चंद्रमौलेश्वर श्रीवास्तव ने प्रभारी बीआरसीसी सहित 3 अन्य लोगों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए जहर खा लिया था जिसके बाद भोपाल में एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी थी। जनशिक्षक की मौत के बाद कलेक्टर ने पूरे मामले में दो सदस्यीय दल को मामले की जांच करने का जिम्मा सौंप दिया था। इसके बाद सबसे पहले त्यागपत्र देने वाले जनशिक्षकों के बयान दर्ज किये गए। हैरानी की बात है कि इस दौरान जिन पर आरोप लगाए गए हैं , उनमे से दो लोग भी एसडीएम कार्यालय में घूमते रहे। साथ ही बयान देने आये जनशिक्षकों से भी बात करते देखे गए। यह था मामला शिक्षा विभाग में 10 जून का दिन उथल-पुथल वाला रहा। केंद्र में रहे बीआरसीऔर बीईओ। पहले तो बीआरसी एसएस सोलंकी से परेशान होकर 16 जनशिक्षकों ने सामूहिक इस्तीफा दिया। करीब आधे घंटे बाद महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उमावि जनशिक्षा केंद्र के जनशिक्षक चंद्रमौलेश्वर श्रीवास्तव ने बीईओ ऑफिस में जहर खा लिया था। लापरवाही का आलम यह रहा, उन्हें करीब आधे घंटे बाद अस्पताल ले जाया गया। संयोग से उनकी इस हालत के पीछे भी बीआरसी की कथित भूमिका बताई जा रही है। जहर खाने वाले जनशिक्षक ने करीब 7 दिन पहले ही कलेक्टर को पत्र लिखकर हालत बयां कर दी थी। तमाम दस्तावेज लेकर पहुँचे जनशिक्षक एसडीएम कार्यालय में हुए बयानों के दौरान जनशिक्षक अपने साथ बीआरसीसी के खिलाफ तमाम दस्तावेज भी लेकर पहुंचे। उन्होंने एलआईसी की पॉलिसी दिखते हुए कहा कि बीआरसीसी शम्भू सोलंकी की पत्नी एलआईसी में एजेंट हैं। बीआरसीसी दवाब डालकर उनसे पॉलिसी कराने के लिए कहते थे। म्याना में पदस्थ जनशिक्षक दिनेश रघुवंशी ने बताया कि बीआरसीसी ने उनपर लगातार पॉलिसी लेने के लिए दवाब डाला। मजबूर होकर उन्हें पॉलिसी खरीदनी पड़ी। इसके लिए उन्होंने 2 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से अपने एक रिश्तेदार से 50 हजार रुपया उठाकर पॉलिसी ली। अब आगे क्या जनशिक्षकों के बयान दर्ज होने के बाद आरोपियों को बयान देने के लिए बुलाया जायेगा। उनके बयान दर्ज किये जायेंगे।सभी दस्तावेजों का परीक्षण किया जायेगा। आवेदनों का भी परिक्षण होगा। टीम जांच करके कलेक्टर को अपना प्रतिवेदन सौंपेगी। उसके आधार पर कलेक्टर कार्यवाही करेंगे। दूसरी तरफ पुलिस के पास भी भोपाल से डायरी आ गयी है। पुलिस अपने स्तर पर अलग से जांच करेगी। पूर्व के जिले में भी चर्चित रहे थे बीआरसीसी गुना में पोस्टिंग से पहले बीआरसीसी शम्भू सोलंकी अशोकनगर जिले में पदस्थ रहे। मुंगावली, अशोकनगर, पिपरई में अपनी पदस्थी के दौरान भी बीआरसीसी शम्भू सोलंकी पर इसी तरह के आरोप लगे थे। वहां भी सीएसी ने शम्भू सोलंकी पर आरोप लगाए थे कि हम जांच करके प्रकरण बनाकर लाते हैं , लेकिन बीआरसीसी सोलंकी उन्हें अपने घर बुलाकर पैसे लेकर मामलों को रफा -दफा कर देते हैं। इसके बाद उनका तबादला अशोकनगर से गुना कर दिया गया था। जनशिक्षकों का यह भी कहना है कि जब पूर्व के जिले में इनके ये कृत्य उजागर हो गए थे, उसके बाद भी गुना में उन्हें बीआरसीसी का प्रभार क्यों सौंपा गया। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक

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