प्लाज्मा डोनेट करने वाले विश्वास को सिंधिया ने दिया धन्यवाद

प्लाज्मा डोनेट करने वाले  विश्वास को सिंधिया ने दिया धन्यवाद
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गुना 07 मई (हि.स.) । कोरोना संक्रमण से अपने माता-पिता को खोने एवं पत्नी सहित खुद गंभीर संक्रमण का शिकार होकर दृढ़ संकल्प से कोरोना से जंग जीतने वाले प्लाज्मा दानी विश्वास तारे को राज्य सभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धन्यवाद दिया है। सिंधिया ने ट्विट किया कि गुना के विश्वास तारे जी जिनका परिवार कोरोना संक्रमण की चपेट में आया व अपने माता-पिता को भी खोया था। उन्होंने अपना ब्लड प्लाज्मा दान कर दो लोगों की जिदंगी बचाई। मैने उनसे बात कर उनके माता-पिता के दुखद निधन पर शोक संवेदना व्यक्त कर इस पुनीत कार्य के लिए उन्हे सह्दय धन्यवाद दिया है। दूसरी ओर विश्वास तारे ने प्लाज्मा दान करने को लेकर अपना प्रेरणास्त्रोत सिंधिया को ही बताया है।उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने के बाद सिंधिया ने न सिर्फ अपना प्लाज्मा दान किया था, बल्कि लोगों से भी ऐसा करने का आग्रह किया था। जिससे दूसरों की जान बचाई जा सके। इसलिए अवसर मिलते ही उन्होने ऐसा किया। अन्य लोग भी करें अनुशरण पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया ने भी विकास के इस कार्य को पुण्य कार्य बताते हुए उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि कोरोना के मरीजों की जान बचाने के लिए विश्वास तारे द्वारा प्लाज्मा देने का कार्य किया है, वह अनुकरणीय है और लोगो को भी उनका अनुशरण करना चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा कोविड के मरीजों का उपचार किया जा सके । वह उनका अभिनंदन करते हैं। गौरतलब है कि विश्वास तारे के माता-पिता का कोरोना संक्रमण से निधन हो चुका है। वह स्वयं भी पत्नी सहित गंभीर संक्रमण का शिकार हुए थे। बाद में वह और उनकी पत्नी स्वस्थ होकर घर वापस लौट आए। इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि ग्वालियर अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित बृजेश दुबे को ए पॉजिटिव प्लाज्मा की सख्त जरूरत है और कहीं से व्यवस्था नहीं हो पा रही है। तो वह ग्वालियर पहुंचे और बृजेश दुबे को अपना प्लाज्मा दान कर उनकी जान बचाई। साथ ही एक अन्य महिला को प्लाज्मा दान किया। यह है रक्तदानी : संक्रमण काल में भी रक्तदान कर बचाई तीन बच्चों की जान - कोरोना संक्रमण काल में एक और अनुकरणीय कार्य सामने आया है। जिसमें थैलसिमिया पीडि़त बच्चों को कृणाल अग्रवाल ने रक्त उपलब्ध कराया है। थैलेसीमिया पीडि़त वीरेन्द्र लोधी को एबी पॉजिटिव ब्लड की जरूरत थी, वही 2 वर्ष के जुड़वा बच्चे सहदेव व सम्रद्धि जोगी को बी पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता पड़ी। ब्लड बैंक में रक्त नहीं होने पर परिजन परेशान होते रहे। इसके बाद वह समाजसेवी विकास जैन नखराली के संपर्क में आए। तब उन्होने उन्हेकृणाल की मदद से रक्त उपलब्ध कराया। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण काल में रक्त की कमी भी सामने आ रही है। जहां रक्तदान शिविर लगाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है तो शिविर आयोजित भी होते है तो संक्रमण के डर से उनमे रक्तदानी नहीं पहुंच रहे है। जिससे रक्त की भारी कमी पैदा हो गई है। ऐसे में गंभीर रोगियों को रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों को हो रही है। जिन्हे एक नियमित अंतराल पर बार-बार रक्त की आवश्यकता महसूस होती है। समस्या इसलिए भी गंभीर है कि कोरोना से बचाव को लेकर 18 से 45 साल के लोगों का टीकाकरण शुरु हो चुका है और चिकित्सकों के मुताबिक टीका लगवाने के बाद तीन माह तक रक्तदान नहीं किया जा सकता है। ऐसे में रक्त का गंभीर संकट पैदा होने की आशंका है। इसलिए युवाओं से टीकाकरण से पहले ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करने का आग्रह किया जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक