ग्रामीण महिलाओं ने संभाली परिवार की आजीविका की जिम्मेदारी

ग्रामीण महिलाओं ने संभाली परिवार की आजीविका की जिम्मेदारी
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अनूपपुर, 29 अप्रैल (हि.स.)। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा गठित महिला स्वसहायता समूह की महिला सदस्यों ने सामाजिक सरोकारों के प्रति अपने दायित्वों को निभाने के साथ-साथ परिवार की आजीविका चलाने की जिम्मेदारी भी संभालने का बीड़ा उठाया है। कोरोना कर्फ्यू में ग्रामीण महिलाओं ने फेस मास्क निर्माण कार्य की शुरूआत कर अपने इन दायित्वों को निभाना शुरू कर दिया है। इससे महिलाएं रोजी-रोटी की चिंता से मुक्त हो गई हैं। लोगों को सुन्दर, सस्ते, टिकाऊ और गुणवत्तायुक्त मास्क उपलब्ध कराने और ग्रामीण महिलाओं के परिवार की आजीविका चलाने के लिए राज्य सरकार ने महिला स्व सहायता समूहों को फेस मास्क निर्माण का काम हाथ में दिया है। कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर एवं मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मिलिंद नागदेवे के निर्देश पर जिले की महिला स्वसहायता समूहों ने मनरेगा श्रमिकों के लिए मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया है। ताकि कोरोना जैसी घातक महामारी से बचाव कर सकें। जिला परियोजना प्रबंधक राज्य ग्रामीण आजीविक मिशन शशांक प्रताप सिंह ने बताया कि जिले के समस्त विकासखंडों के 41 ग्रामों के 132 समूहों की महिला सदस्य ने मास्क निर्माण के कार्य मे जुटी हुई हैं। अबतक 52 हजार से ज्यादा मास्क का निर्माण किया जा चुका है। स्व सहायता समूहों द्वारा बनाये जा रहे मास्क एक ओर मनरेगा श्रमिकों को कोरोना के संक्रमण से बचाव में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर समूह की महिला सदस्यों को कोरोना काल में आर्थिक मदद भी प्राप्त होगी। जिसके सहारे उनके परिवार का भरण-पोषण चलेगा। विदित हो कि गत वर्ष कोरोना काल में इन महिला स्वसहायता समूहों ने 2 लाख 3 हजार मास्क बना कर अपनी आजीविका चलाई थी। जिसे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग समेत राजस्व, स्वास्थ, पुलिस,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं स्वयंसेवी संगठनों को बेचे गए थे। मास्क निर्माण के साथ कोरोना वॉलिंटियर्स के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहीं हैं। हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश शुक्ला