मध्य-प्रदेश

चिटफंड कंपनी के 10 संचालकों की साढ़े तीन करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

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उज्जैन, 23 फरवरी (हि.स.)। कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देश पर जिले में चिटफंड कंपनी माफियाओं के विरुद्ध निरन्तर कड़ी कार्यवाही की जा रही है। प्रयास किया जा रहा है कि उनकी प्रापर्टी को कुर्क कर ठगे गये व्यक्तियों को राहत पहुंचाते हुए उनकी राशि उन्हें लौटाई जा सके। इसी तारतम्य में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी नरेन्द्र सूर्यवंशी द्वारा मंगलवार को उनके कोर्ट में प्रचलित प्रकरण में मप्र निक्षेपकों का हित संरक्षण अधिनियम-2000 की धारा-4 के अन्तर्गत ग्लोरिया प्रापर्टी इंडिया के 10 संचालकों की अनुमानित साढ़े तीन करोड़ रुपये कीमत की कुल 13.5 हेक्टेयर जमीन कुर्क करने के आदेश जारी कर दिये गये हैं। एडीएम द्वारा क्राइम ब्रांच पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर मप्र निक्षेपकों का हित संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत यह कार्रवाई की है। ग्लोरिया प्रापर्टी इंडिया के संचालक ग्राम भिंडोदाखुर्द निवासी धर्मेन्द्र पुत्र उमरावसिंह, संतोष पुत्र शिवनारायण, जालमसिंह पुत्र मांगीलाल, ग्राम जैतपुरा धार निवासी घनश्याम पुत्र रघुनाथ पंवार, ग्राम सिंगापुर नेस्ट कैलोद इन्दौर निवासी नेपालसिंह पुत्र प्रहलादसिंह नरूका, ग्राम बलेड़ी उज्जैन निवासी जितेन्द्र पुत्र शंकरलाल राठौर, महाकाल क्षेत्र उज्जैन निवासी महेश पुत्र राजाराम शर्मा, ग्राम सुराखेड़ी बडऩगर निवासी राजू उर्फ राधेश्याम, ग्राम बमनापाती बडऩगर निवासी जितेन्द्र पुत्र राधेश्याम जोशी तथा विक्रम पुत्र बद्रीलाल राठौर निवासी घुड़ावन बडऩगर की विभिन्न ग्रामों में स्थित कुल भूमि 13.5 हेक्टेयर कुर्क करने की कार्रवाई की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत साढ़े तीन करोड़ बताई गई है। उल्लेखनीय है कि उक्त जमीन अनावेदकों के स्वयं के नाम से है अथवा कुछ जमीन ग्लोरिया कंपनी के नाम से निवेशकों के पैसे से ली गई है। जारी आदेश में एडीएम ने सम्बन्धित क्षेत्र के तहसीलदारों को निर्देश दिये हैं कि वे अनोवदकों की उक्त अचल सम्पत्ति कुर्क कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। साथ ही कहा है कि उक्त सम्पत्ति खुर्दबुर्द न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्था की जाए तथा अधिनियम की धारा-4 अनुसार कुर्क सम्पत्तियों का लेखा संधारित किया जाये। मप्र निक्षेपकों का हित अधिनियम में वर्णित प्रावधान अनुसार उक्त कुर्की के अन्तकालीन आदेश को आन्यांाुतिक (एब्सोल्यूट) बनाने की कार्यवाही विशेष न्यायाधीश के न्यायालय में यह आदेश जारी होने के 15 दिवस में प्रस्तुत करना आवश्यक है। इस कार्यवाही के लिये अनुविभागीय दण्डाधिकारी उज्जैन को आवेदन प्रस्तुत करने के लिये निर्देशित किया गया है। साथ ही एसडीएम को निर्देशित किया गया है कि वे ऐसे समस्त निवेशकों की सूची भी तैयार करें, जिनसे अनावेदकगण ने राशि प्राप्त की है, ताकि सम्पत्ति कुर्की के पश्चात नीलामी की स्थिति में विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर सर्वसम्बन्धित को भुगतान करने में आसानी हो सके। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश

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