किसी भी परिस्थिति में लडऩे के लिए योग से प्राप्त होती है सकारात्मक ऊर्जाः डा. गुप्ता

किसी भी परिस्थिति में लडऩे के लिए योग से प्राप्त होती है सकारात्मक ऊर्जाः डा. गुप्ता
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रतलाम, 20 जून (हि.स.)। शासकीय मेडिकल कॉलेज के डीन जितेंद्र गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि कोरोनाकाल के समय जब डीन के पद पर कार्यरत हुए तब चारों ओर ऐसा वातावरण बन गया जो कि मैं खुद मानसिक रूप से कमजोर हो रहा था, तब मुझे शिवानी दीदी के सकारात्मक विचार सुनने को मिले जिससे मेरे अंदर फिर से सकारात्मक ऊर्जा सी भर गई और मैंने पूरेस्टॉफ को योग कराया ताकि सकारात्मकता ऊर्जा का वाइब्रेशन चारों ओर फैले। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में लडऩे के लिए सकारात्मक ऊर्जा का होना बहुत आवश्यक हैं,जो योग से प्राप्त होती है। जिला योग प्रभारी आशा दुबे ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सबसे पहले निरोगी काया बाद में सब मोह माया। हम स्वयं को ठीक रखेंगे तो स्वस्थ रहेंगे। अगर आपके पास अच्छे विचार अच्छे संकल्प होंगे तो दूसरों को भी वहीं दे पाएंगे। अगर आपके पास नकरात्मकता होगी तो दूसरों को देकर भी वहीं मिलेगा। अगर हरेक ये समझे कि हमें अपने जीवन को स्वस्थ, सुख व खुश रखना है तो योगासन के साथ राजयोग को भी जीवन में अपनाना होगा। इसके साथ ही उन्होंने कई योगासन एवं प्राणायाम आदि भी करवाएं। सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्मा कुमारी सविता दीदी ने बताया कि राजयोग हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है हमारे हर बोल कर्म,सोच व व्यवहार मे सबमें सकारात्मकता लाना यही योग है राजयोग द्वारा स्वयं पर राज्य कर अपने कर्म इंद्रियों को कंट्रोल करना। उन्होंने बताया कि परमात्मा शक्ति से हमारी मन की एकाग्रता बढ़ती है ,संकल्प श्रेष्ठ होते हैं, सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है यही जीवन जीने की कला है रात को सोने से पहले स्वयं की चेकिंग कर परमात्मा का धन्यवाद करना हैं। उन्होंने राजयोग का भी अभ्यास कराया। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रम्हाकुमारी गीता दीदी ने कहा की तनाव,दुख ,भय,चिंता नकारात्मक सोच,अवसाद, व्यसन,बुरी आदतें जैसे लक्षणों से स्वयं को ठीक करने के लिए और आंतरिक शांति,आध्यात्मिक शक्तियों का अनुभव करने के लिए राजयोग की साधना द्वारा स्वयं को मस्तक के बीच विराजमान बिंदु आत्मा समझ कर सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा को याद करें यही राजयोग है। हिन्दुस्थान समाचार / शरद जोशी