मानसून के बारिश के पानी को सहेजने अबतक नहीं बनी योजना

मानसून के बारिश के पानी को सहेजने अबतक नहीं बनी योजना
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अनूपपुर, 08 जून (हि.स.)। जलसंकट की समस्या से जूझ रहा अनूपपुर जिलाजलसंकट से निपटने मानसून की बारिश की सम्भावनाओं को लेकर शासन जल सहेजने तरह तरह की कार्यनीतियां बना रही है, लेकिन अनूपपुर नगरीय व जिला प्रशासन आगामी मानसून के दौरान उसके जल सहजने गम्भीर नहीं दिख रहा है। पांडव और कल्चुरी कालीन तालाबों की नगरी माने जाने वाली अनूपपुर नगर पालिका क्षेत्र की समस्त 20 बड़ी तालाबें जलसरंक्षण के अभाव में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। इन तालाबों में आगामी मानसून के बारिश की पानी को संरक्षित रखने कोई उपाय नहीं किए गए हैं। नगर की सभी तालाबें आज भी गंदगी, जंगली घास तथा अतिक्रमण की चपेट में बेहाल पड़ी है। इससे पूर्व शहडोल संभागायुक्त के आदेश के पालनार्थ प्रत्येक वर्ष की भांति नगरीय क्षेत्र की 20 तालाबों में एकमात्र सामतपुर मडफा तालाब में श्रमदान व गहरीकरण कर उसे जलसरंक्षित करने का प्रयास किया गया। शेष तालाबों की ओर न तो नगर पालिका और ना ही जिला प्रशासन ने जीर्णोद्धार के लिए प्रयास किए हैं। अधिकारियों की उदासीनता में नगरवासियों का कहना है कि सालोंभर पानी से लबालब रहे इन तालाबों के कारण कभी भी अनूपपुर नगरीय क्षेत्र जलसंकट की समस्या से नहीं जूझा। दुल्हा (दुलहरा) तालाब, बोकरा तालाब, रजहा तालाब, उंजीर तालाब, सामतपुर मडफा तालाबा, बूढ़ी माई मढिय़ा तालाब सहित अन्य तालाब नगर में बड़ी जलस्त्रोत मानी जाती थी। लेकिन नगर पालिका और जिला प्रशासन ने इन तालाबों को बचाने कभी प्रयास नहीं किया। कुछ लोगों ने राजनीति सरंक्षण में तालाबों की मेढ पर बिना अनुमति पक्के आवासीय मकान निर्माण कर तालाबों पर कब्जा जमा लिया। कुछ तालाबों पर लाखों खर्च तो किए गए लेकिन कभी उन तालाबों का सौन्दर्यीकरण और जलसंरक्षण के प्रति नीतियां नहीं बनाई गई। हालात यह है कि सालोंभर पानी से लबालब रहने वाला तालाब अब समतल मैदान नजर आ रहा है। विदित हो कि सामतपुर मडफा तालाब पर नगर पालिका ने उसके सौन्दर्यीकरण व गहरीकरण पर करोड़ों रूपए खर्च किया है। यहां तक सोननदी की जलधारा से तालाब को जलापूर्ति कराने पाईपलाईन भी बिछाकर जलभराव करने की व्यवस्था भी बनाई है। वर्ष 2020 में प्रशासन पांडवकालीन मडफा तालाब का गहरीकरण कर उसे इस वर्ष सूखने से बचा लिया। जानकारों का मानना है कि नगर की सभी तालाबों का तल मिट्टी भराव के कारण उपर आ गया है। इसके अलावा बारिश क की पानी का तालाब तक बनी पहुंच मार्ग भी अतिक्रमण की चपेट में बंद हो गई है। जबकि जलसंरक्षण में कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए। दशकों से नहीं ली सुध नगरपालिका की समस्त 20 तालाबों में जलभराव व उसके संरक्षण में पिछले एक दशक से नगर पालिका और जिला प्रशासन द्वारा कोई पहल नहीं की गई है। यहां तक पदाधिकारियों ने नगरीय क्षेत्र में वाटर हावेस्टिंग सिस्टम को भी लागू कराने पहल नहीं की। जबकि नगरीय क्षेत्र में रोजाना 8-10 नए रिहायसी मकान खड़े हो रहे हैं। लेकिन कभी अनूपपुर नगर की प्यास बुझाने तथा लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाली प्राचीन बड़ी तालाबें प्रशासन की अनदेखी में सूखकर समतल मैदान के रूप में नजर आ रही है। तालाबों का कभी नहीं हुआ सर्वेक्षण और सीमांकन बताया जाता है कि नगरीय क्षेत्र की तालाबों को लेकर कभी नगरीय प्रशासन द्वारा सर्वेक्षण और उसके सीमांकन के लिए प्रयास नहीं किए गए हैं। आलम यह है कि दशकों से बेसुध प्रशासन को देखते हुए अब तालाबों की मेढ पर पक्के निर्माण खड़े हो गए। कुछ ने मेड को पाटकर घरों की गंदगी को तालाबों में उतार दिया है। जबकि कुछ जलस्त्रोत के अभाव में सूख गई है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी हरिओम वर्मा ने बताया कि हमारे पास समस्त तालाबों के सौंन्दर्यीकरण व गहरी के लिए कोई विशेष बजट नहीं है। सामतपुर तालाब के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाएं बनाई गई है। हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला