ओबीसी आरक्षण पर तेज हुई सियासत, सीएम शिवराज ने कमलनाथ के पत्र का दिया करारा जवाब
ओबीसी आरक्षण पर तेज हुई सियासत, सीएम शिवराज ने कमलनाथ के पत्र का दिया करारा जवाब
मध्य-प्रदेश

ओबीसी आरक्षण पर तेज हुई सियासत, सीएम शिवराज ने कमलनाथ के पत्र का दिया करारा जवाब

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भोपाल, 02 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण मामले को लेकर राजनीति तेज है। मप्र के पूर्व सीएम कमलनाथ ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरक्षण लागू करने में जानबूझकर देरी करने और ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया था। कमलनाथ के पत्र के जवाब में सीएम शिवराज ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब आप सरकार में थे यदि तब आपने उचित प्रयास किए होते तो आज यह स्थिति नहीं होती। इसलिए प्रदेश में भ्रम फैलाना बंद करें। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ओबीसी आरक्षण मामले पर 15 दिन बाद कमलनाथ के पत्र का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए हमारी सरकार हाईकोर्ट में मजबूती से प्रभावी पक्ष रखेगी। सीएम शिवराज ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण 14 से 27 किए जाने पर जब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, तो तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने समय रहते कोर्ट में जवाब ही पेश नहीं किया, जिस पर हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2019 को ओबीसी आरक्षण का निर्णय ही स्थगित कर दिया। इतना ही नहीं सरकार का पक्ष रखने कोई भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर आरोप लगाते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि ये तत्कालीन कांग्रेस सरकार की लापरवाही और गंभीर उदासीनता थी कि ना तो 8 महीने तक न्यायालय में जवाब दावा पेश किया और न ही स्टे हटवाने का कोई विशेष प्रयास किया। अपने पत्र में आगे सीएम शिवराज ने कहा है कि मप्र के आर्थिक रूप से कमजोर और ओबीसी के लिए भाजपा सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। महामारी के इस दौर में भी भाजपा सरकार ने उनके हित के लिए काम किए है। जबकि कांग्रेस सरकार ने सिर्फ जनता में भ्रम फैलाने का काम किया है। ऐसी स्थिति में कमलनाथ को इस मुद्दे पर बोलने का कोई हक नहीं है। यदि कमलनाथ सरकार ने 15 महीने में प्रदेश के ओबीसी जातियों की स्थिति सुधारने के लिए कोई काम किए होते तो आज इसकी नौबत ही नहीं आती। हिन्दुस्थान समाचार/ नेहा पाण्डेय-hindusthansamachar.in