भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक एवं सौभाग्य दशमी पर्व मनाया
भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक एवं सौभाग्य दशमी पर्व मनाया
मध्य-प्रदेश

भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक एवं सौभाग्य दशमी पर्व मनाया

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चंदेरी, 30 जुलाई (हि.स.)। श्रावण मास को धर्म माह कहे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस माह में हरियाली अमावस्या, नाग पंचमी, रक्षाबंधन पर्व एवं भगवान शिव की विशेष उपासना होती है, वहीं जैन धर्म में भी इसी माह में वर्षायोग प्रारम्भ, वीर शासन जयंती, श्री पार्श्वनाथ भगवान निर्वाण महोत्सव, मोक्ष सप्तमी, सौभाग्य दशमी व्रत एवं 700 मुनिराजो का उपसर्ग निवारण (रक्षा बंधन पर्व) आदि अनेक पर्व इसी माह में आते हैं। अतः श्रावण मास धर्माराधन के लिए विशेष माह है। इसी तारतम्य में जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर, उपसर्ग विजेता भगवान पार्श्वनाथ जी भगवान का मोक्ष कल्याणक महामहोत्सव संस्कार प्रणेता मुनि श्री पद्मसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में मनाया गया। मुनि श्री ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ जी को उनके दस भवों से बैर पालने बाले कमठ के जीव ने अनेक उपसर्ग किये, लेकिन भगवान हमेशा उपसर्ग को समता भाव से सहन करते हुए उसको क्षमा करते रहे एवं निर्वाण पद प्राप्त कर जगत पूज्य हो गए और भगवान से वैर रखने के कारण कमठ के जीव को नरक के दुःख भोगना पड़े. अतः हमें कभी भी किसी से वैर भाव नहीं रखना चाहिए. इस अवसर पर 900 वर्ष प्राचीन मूलनायक अतिशय कारी श्री पार्श्वनाथ जी भगवान का महामस्तकाभिषेक 108 रजत कलशों द्वारा किया गया। दोपहर में मुनि श्री के पावन सानिध्य में श्री कल्याण मंदिर विधान का आयोजन भी सभी मानव जाति के कल्याण की भावना हेतु किया गया । सौभाग्य दशमी का पर्व महिलाओ द्वारा श्री जिनेन्द्र भगवान की विशेष पूजन अर्चना कर मनाया गया। इस शुभ प्रसंग पर कोरोना नामक वायरस की समाप्ति हेतु श्री महाभिषेक किया गया। सौभाग्य दशमी व्रत श्रावण शुक्ल दशमी को किया जाता हैं। इस दिन उपवास रखकर श्री जिनेन्द्र प्रभु की भक्ति आराधना करके व्रत प्रारम्भ करते हैं। जैन प्रवक्ता ने बताया कि श्री मंदिर जी में प्रतिदिन विश्व में व्याप्त महामारी के निवारण के लिए श्री जिन अभिषेक, महा शांति धारा, सभी निरोगी हों, स्वस्थ्य हो इस उद्देश्य को लेकर मुनि श्री के मुखारबिंद से की जा रही है । हिन्दुस्थान समाचार/निर्मल विश्वकर्मा /राजू-hindusthansamachar.in