वट के समान पति की दीर्घायु के लिए विवाहिताओं ने की वट पूजा

वट के समान पति की दीर्घायु के लिए विवाहिताओं ने की वट पूजा
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अशोकनगर, 10 जून(हि.स.)। हिन्दु धर्म में प्रकृति के संरक्षण तथा उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए प्राकृतिक तत्वों की पूजा करने की परम्परायें हैं। इसी श्रंखला में वृक्षों की पूजा का विशेष महत्व है, उनमें देवताओं का वास माना गया है। इनमें वट वृक्ष का हिन्दु धर्म में विशिष्ट स्थान माना गया है। व्रत-त्यौहारों में गुरुवार को यहां वट-सावित्री की पूजा विवाहिताओं द्वारा की गई। मान्यता है कि वट वृक्ष के नीचे ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान पुनर्जीवित किया था। सावित्री को भारतीय संस्कृति में एक आदर्श नारी और पतिव्रता के लिए ऐतिहासिक चरित्र माना जाता है। पति की रक्षा के वे यमराज के पीछे पड़ गईं थीं और अपने पति को जीवनदान देने के लिए विवश कर दिया था। इसी वजह से हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत महिलाओं द्वारा रखा जाता है। तभी से विवाहितायें अपने पति की लंबी आयु के लिए वट-सावित्री के दिन वट (बरगद) की पूजा करती हैं। इस वट-सावित्री पूजा में विवाहितायें कामना करती हैं कि उनके पति की आयु भी वट वृक्ष के समान दीर्घायु हो। इस पूजा में विवाहितायें वट वृक्ष की पूजन के समय वृक्ष के चारों ओर सूत के धागे परिक्रमा के दौरान लपेटती हैं, जिसे रक्षा कहा जाता है। इस तरह महिलाओं के द्वारा जहां धार्मिक मान्यताओं के लिए जहां वट वृक्ष की पूजा की जाती है, वहीं इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण कार्य को भी बढ़ावा मिलता है। हिन्दुस्थान समाचार/ देवेन्द्र ताम्रकार