कमलनाथ ने सीएम शिवराज को लिखा पत्र, कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोकने के फैसले पर किया विरोध
कमलनाथ ने सीएम शिवराज को लिखा पत्र, कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोकने के फैसले पर किया विरोध
मध्य-प्रदेश

कमलनाथ ने सीएम शिवराज को लिखा पत्र, कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोकने के फैसले पर किया विरोध

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भोपाल, 29 जुलाई (हि.स.)। उपचुनाव से पहले कांग्रेस विभिन्न मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आक्रामक हो रही है। वहीं अब कांग्रेस ने सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन वृद्धि रोकने के फैसले को मुद्दा बनाया है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने सीएम शिवराज को पत्र लिखकर सरकार के इस फैसले का विरोध किया है और सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। कमलनाथ ने बुधवार को सीएम शिवराज को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा कि मैं आपके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। चूंकि आप निरंतर सक्रिय है इसलिए मैं आपका ध्यान कर्मचारियों के साथ लगातार हो रहे अन्याय की ओर दिलाना चाहता हूं। हाल ही मैंने समाचार पत्रों में पढ़ा है कि आपकी सरकार ने कर्मचारियों को वार्षिक वेतन वृद्धि न देने का फैसला किया है। प्रशासनिक भाजपा में आपने उन्हें काल्पनिक वार्षिक वेतन वृद्धि दी है। इसके पूर्व मेरी सरकार ने कर्मचारियों को 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने का निर्णय लिया था। इस फैसले पर भी आपकी सरकार ने रोक लगा दी जिसके संबंध में मैंने आपकों पूर्व में भी एक पत्र लिखा था। यही नहीं आपकी सरकार ने कर्मचारियों को मिलने वाले सातवें वेतनमान के एरियर्स की राशि, जो अंतिम किश्त के रुप में दी जानी थी, उसे भी न देेने का निर्णय भी लिया है। उन्होंने कहा कि यह भी ज्ञात हुआ है कि पर्यटन विभाग के अंतर्गत कर्मचारियों को 50 प्रतिशत वेतन न देने का निर्णय भी लिया गया है। विगत पांच माह में आपकी सरकार ने निरंतर कर्मचारियों के हित एवं उनके अधिकारों को छिनने वाले निर्णय लिए है, जिसका कांग्रेस पार्टी विरोध करती है। अपने पत्र में कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को अलोकतांत्रिक तरीके से गद्दारों के साथ मिलकर हटाने का भाजपा ने जो कृत्य किया है, उसके परिणामस्वरुप आज प्रदेश के 25 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहे हैं। इन उपचुनावों में लगभग जो 100 करोड़ खर्च हो रहे हैं इसके जवाबदेह भी आज की सरकार ही है। कमलनाथ ने आरोप लगाते हुए कहा कि इन उप चुनावों को येनकेन प्रकारेण जीतने के लिए प्रतिदिन सरकार द्वारा करोड़ों रुपयों के कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। ब्रांडिंग और विज्ञापनों पर भी निरंतर राशि खर्च की जा रही है। अगर प्रदेश के आर्थिक हालात वास्तव में खराब है तो उक्त कार्य चुनाव के लिए कैसे स्वीकृत हो पा रहे हैं। स्पष्ट है कि सरकार द्वारा प्रदेश की जनता एवं कर्मचारियों दोनों को भ्रमित कर धोखे में रखा जा रहा है। कमलनाथ ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि अत: मेरा आपसे अनुरोध है कि कर्मचारियों के रोके गए समस्त लाभ अविलंब प्रदान करने का निर्णय लेने का कष्ट करें जिससे प्रदेश के कर्मचारी दौगुने उत्साह से वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने में अपना सक्रिय और महती योगदान दे सकेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/ नेहा पाण्डेय-hindusthansamachar.in