कोरोना की तीसरी लहर का कैसे होगा उपचार, तैयार नहीं अधिकांश आइसोलेशन वार्ड

कोरोना की तीसरी लहर का कैसे होगा उपचार, तैयार नहीं अधिकांश आइसोलेशन वार्ड
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-सभी सीएचसी को कोविड आइसोलेशन वार्ड में तब्दील के साथ अन्य सहयोग सेंटर किए जाने थे तैयार अनूपपुर, 13 मई (हि.स.)। जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने प्रशासनिक तैयारियों के विपरीत अधिक नुकसान पहुंचाया है। जिसमें हजारों नागरिकों को संक्रमित करने के साथ सैकड़ों को असामायिक मौत की नींद सुला दी। वहीं अब तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। लेकिन प्रशासनिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के आधार पर तैयारी अधूरी है। जबकि कोरोना संक्रमण के खतरे से बचने जिला व स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा स्थानीय प्रशासकीय अधिकारियों की निगरानी में मरीजों को तत्काल राहत प्रदान करने स्थानीय स्तर पर ऑक्सीजन बिस्तर युक्त आइसोलेशन वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए थे। साथ ही स्थानीय मरीजों को इन्हीं आइसोलेशन सेंटर में भर्ती और इलाज किए जाने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि आबादी अनुसार आइसोलेशन वार्डो को तैयार रखे और गम्भीर मरीजों को इलाज के लिए ही जिला चिकित्सालय कोविड आइसोलेशन वार्ड भेजे। लेकिन प्रशासकीय तैयारियों और दिए निर्देश में अभी भी जिले के सीएचसी सहित अन्य प्रस्तावित आइसोलेशन वार्ड तैयार नहीं हो सके। कुछ सेंटर में संसाधनों की कमी है तो कुछ में स्टाफ की। कुछ सेंटर में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं तो कुछ में बिस्तर का अभाव है। जिसके कारण स्थानीय मरीजों को अब भी आइसोलेशन सेंटर की सुरक्षित सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय में जिला चिकित्सालय और शासकीय कन्या शिक्षा परिसर के साथ जिला व स्वास्थ्य प्रशासन ने जैतहरी, फुनगा, परासी, वेंकटनगर, राजेन्द्रग्राम, करपा, कोतमा में 10-25 बिस्तरो वाला ऑक्सीजन बिस्तर तैयार रखने के साथ प्राथमिक इलाज के सभी उपकरण और दवाईयां उपलब्ध रखने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा बिजुरी, राजनगर, जमुना कोतमा में भी आइसोलेशन सेंटर बनाने स्वास्थ्य विभाग व स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया गया था। लेकिन आश्चर्य कोरोना की दूसरी लहर के अब पिक आवर अब थमने के बाद भी इनमें आधे से अधिक सीएचसी व अन्य सेंटर आइसोलेशन सेंटर में तब्दील नहीं हो सके हैं। कहां मिल रही आइसोलेशन सेंटर की सुविधा वर्तमान में जिला मुख्यालय के दोनों सेंटर सहित जैतहरी, कोतमा, राजेन्द्रग्राम, परासी, फुनगा सीएचसी को ही पूरी सुविधा के साथ संचालित कर पा रहे हैं। जबकि करपा, वेंकटनगर और कोठी सीएचसी के अलावा बिजुरी और राजनगर में आइसोलेशन सेंटर संचालित नहीं हो सका है। बताया जाता है कि इन सेंटरों में संसाधनों के अलावा चिकित्सकों व स्टाफों की कमी बनी हुई है। जिले में इतने स्थानों पर हो सकता था सेंटर सुविधाओं व उपलब्ध सीएचसी सेंटरों के अलावा जिले में जिला मुख्यालय के दो सेंटर के अलावा जैतहरी, फुनगा, कोतमा, वेंकटनगर, कोठी, राजेन्द्रग्राम, करपा, बिजुरी, राजनगर, जमुना कोतमा सहित 12 सेंटर बनते। इनमें कोठी सीएचसी निर्माण के बाद अबतक उपयोग में नहीं आ सका है। जबकि वेंकटनगर में एक चिकित्सक और दो स्टाफ नर्स में फीवर क्लीनिक संचालन कराया जा रहा है। यहां ऑक्सीजन की उपलब्धता बनी है, लेकिन अन्य उपकरण के साथ स्टाफों की कमी बनी हुई है। जबकि करपा, बेनीबारी, अमरकंटक, जैसे क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए अब भी जांच और इलाज के लिए राजेन्द्रग्राम सीएचसी आने की मजबूरी है। इसी तरह कोठी के ग्रामीणों को बिजुरी पीएचसी जांच के लिए और इलाज के लिए कोतमा जाना पड़ रहा है। वर्तमान मरीजों की स्थिति अब तक प्राप्त कोरोना जांच रिपोर्ट मे जिले में 7724 व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। वर्तमान में एक्टिव कोरोना संक्रमितों की संख्या 1673 है। अब तक 5987 स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में 30 से अधिक गम्भीर मरीज हैं। हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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