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मध्य-प्रदेश

हिन्दुस्थान समाचार की खबर पर खाद्य मंत्री ने लिया संज्ञान, पड़मनिया दुकान हुई ऑफलाइन

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पीओएस मशीन की जगह समग्र आईडी के माध्यम से वितरण प्रारंभ अनूपपुर, 23 फरवरी (हि.स.)। जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ अंतर्गत संचालित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति पड़मनिया में मोबाईल नेटवर्क नहीं होने से पात्र हितग्राहियों को बॉयोमैट्रिक प्रमाणिकरण के लिए 21 फरवरी को शासकीय दुकान से 3 किमी दूर जंगल में ले जाकर पीओएस मशीन में अगूंठा लगवाया जा रहा था, जहां अचानक जंगल में बाघ के आ जाने से ग्रामीणों में भगदड़ मची। यह खबर हिन्दुस्थान समचार ने 22 फरवरी को प्रमुखता से दी थी, जिस पर खाद्य एवं नागरिक उपभोक्ता संरक्षण मंत्री बिसाहूलाल सिंह संज्ञान में लेते हुए 24 घंटे के अंदर शासकीय दुकान पड़मनिया को ऑफलाइन करा दिया। जहां हितग्राहियों को मंगलवार सेे खाद्यान्न का वितरण ऑफलाइन समग्र आईडी के माध्यम से प्रारंभ हो गया है। अब समग्र आईडी के माध्यम से मिलेगा खाद्यान्न पूर्व में शासकीय दुकान पड़मनिया में पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरण के पहले उन्हे जंगल स्थित पहाडिय़ों में ले जाकर खाद्यान्न नेटवर्क की उपलब्धता अनुसार पीओएस मशीन में उनका अगूंठा लगाकर वापस दुकान में आकर सेल्समैन द्वारा खाद्यान्न का वितरण किया जाता रहा है, जहां अचानक बाघ के आ जाने की घटना के बाद दुकान को ऑफलाइन कर दिया गया है, जहां पात्र हितग्राहियों को दुकान से सीधे समग्र आईडी के माध्यम से खाद्यान्न वितरण किया जा सकेगा। इसके लिए सेल्समैन को पीओएस मशीन को मोबाईल नेटवर्क स्थान में ले जाकर पहले डेटा अपलोड करना होगा, उसके बाद हितग्रहियों को उनकी समग्र आईडी पीओएस मशीन में डालकर खाद्यान्न वितरण किया जाएगा और बाद में फिर से नेटवर्क स्थान में आकर डेट को अपलोड करना किया जाएगा। खाद्यान्न वितरण में नेटवर्क बड़ी समस्या वर्ष 2019 से खाद्यान्न वितरण के लिए हितग्राहियों का पीओएस मशीन में बॉयोमैट्रिक प्रमाणिकरण के लिए अंगूठा लगाकर ऑनलाईन खाद्यान्न का वितरण किया जाने लगा, जिसके बाद जिले में कई ऐसी दुकानें हैं, जहां नेटवर्क न होने के कारण सेल्समैनों को खाद्यान्न वितरण करने में परेशानी आ रही है। जिसमें उन्हें नेटवर्क के लिए या तो जंगल या तो दुकान से आधे एक किमी दूर स्थानों में ग्रामीणो को बुलाकर पहले उनका बॉयोमैट्रिक प्रमाणिकरण किया जाता है और बाद में उन्हें दुकान लाकर खाद्यान्न का वितरण किया जाता रहा है। नेटवर्क न होने वाले जिले के 21 दुकानें हैं, जिनमें आज भी केकरपानी शासकीय दुकान सहित 4 अन्य दुकानें जहां ग्रामीणों को आधा किमी दूर लेकर उनका बॉयोमैट्रिक सत्यापन कर वापस दुकान में लाकर खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। जिस पर जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए दुकानों को भी ऑफलाइन किए जाने के लिए भोपाल से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश शुक्ला

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