पहला डोज कोवीशील्ड का दूसरा लगा दिया कोवैक्सीन का

पहला डोज कोवीशील्ड का दूसरा लगा दिया कोवैक्सीन का
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उज्जैन, 08 जून (हि.स.)। शहर में वैक्सीनेशन को लेकर जिला टीकाकरण विभाग कितना लापरवाह है तथा प्रशासनिक मानीटरिंग कितनी कमजोर है, इसका एक उदाहरण पूर्व में हिंदुस्थान समाचार द्वारा जारी किया गया था, हालांकि उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूसरा मामला फिर सामने आ गया है। इस पर लीपापोती की कोशिशें जारी है। पूरा मामला कितना गंभीर है, इसे पढ़कर पाठक भी चौंक जाएंगे कि आखिर स्वास्थ्य अमला क्या कर रहा है? मन में प्रश्न उठेगा कि निर्देशों के पालन में क्यों कोताही हो रही है? महिला को पहले कोविशील्ड लगा था, अब लगा दिया कोवैक्सीन महाशक्ति नगर निवासी एक 45+ महिला पुलिस हॉस्पिटल, नागझिरी में पहला टीका लगवाने गई तो उन्हे कोवीशिल्ड का टीका लगाया गया। सीधे हाथ में टीका लगवाकर वे अपने घर आ गई। उनके मोबाइल फोन पर एसएमएस भी आ गया कि उन्हे पहला डोज लग गया है। उनके बेटे ने एसएमएस में दी गई लिंक अनुसार पहले डोज का प्रमाण पत्र भी डाउनलोड कर लिया। जब दूसरा डोज लगवाने गई तो यह हुआ उक्त महिला दूसरा डोज लगवाने अपनी सहेली के साथ महानंदानगर कम्युनिटी हाल में गई। यहां उसने बताया कि उसका पहला डोज लग चुका है, दूसरा लगवाना है। महिला से किसी ने यह नहीं पूछा कि पहला डोज किस वैक्सीन का लगा था? मोबाइल नम्बर लेकर पंजीयन की प्रक्रिया शुरू की और दूसरा डोज लगा दिया। जब डोज लगवा लिया, तब बातों बातों में महिला को पता चला कि उसे कोवैक्सीन का डोज दे दिया गया है, जबकि पहला डोज उसे कोवीशिल्ड का दिया गया था? उसने तत्काल उपस्थित डॉक्टर को बताया। उपस्थित स्वास्थ्य कर्मचारियों ने महिला को समझा दिया कि कुछ नहीं होगा, दोनों टीके एक ही है। इसके बाद महिला अपने घर चली गई। इधर उसके मोबाइल पर दूसरे डोज का एसएमएस नहीं आया। महिला के पति ने पहला डोज लगाने वाले डॉक्टर से सम्पर्क किया। अरे आपका तो रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ ? महिला के पति ने पुलिस हॉस्पिटल, नागझिरी सम्पर्क किया तो उन्हे बताया गया कि अब यहां का स्टॉफ पुलिस कम्युनिटी हॉल, सर्किट हाउस के समीप,टीका लगा रहा है। वहां उन्होने सम्पर्क किया। यहां उपस्थित डॉक्टर ने सारी बातें सुनी तो चौंके। उन्होंने मोबाइल नम्बर लेकर एप पर डाला। फिर चौंककर बोले: अरे, तुम्हारा तो दूसरे डोज का रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ है। ऐसे में प्रमाण पत्र कैसे मिलेगा? साथ ही पूछा कि क्या घटनाक्रम हुआ था? उसके बाद समझाया कि चार दिन बित गए हैं, ऐसे में आप अब चिंता न करें। आप तो ओर अधिक स्ट्रांग हो गई हैं। आपकी बॉडी अधिक एंटीबॉडी बन गई है। यह कहकर उनको समझा दिया गया। यह है अंदर की बात जानकारी मिली कि महिला का अब कभी भी दोनों डोजवाला प्रमाण पत्र डाउनलोड नहीं होगा। कारण बताया कि जहां दूसरा डोज गलती से लगाया गया, उन्होने अपनी गलती छिपाने के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस निरस्त कर दी। ऐसे में एक ही विकल्प है कि महिला पुन: दूसरा डोज कोवीशिल्ड का लगवाए, जोकि शरीर के लिए घातक हो सकता है। ऐसा कर सकते हैं...कलेक्टर से पूछना पड़ेगा दूसरा विकल्प बताया गया। महिला का कोवीशिल्ड के डोज का रजिस्ट्रेशन कर लिया जाए ओर टीका नहीं लगाया जाए। ऐसे में उनके मोबाइल फोन पर दूसरा डोज लगाने का एसएमएस आ जाएगा। उन्हे प्रमाण पत्र मिल जाएगा, लेकिन इस बात की अनुमति कलेक्टर से लेना होगी। यह था पहला मामला पुलिस सामुदायिक केंद्र, सर्किट हाउस के समीप नर्स द्वारा कुर्सी पर बैठे-बैठे एक हाथ से ही टीका लगाया जा रहा था। जिन्हें टीका लगाया गया,उनको खून भी निकला। इस बात की शिकायत कलेक्टर तक पहुंची थी,लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई। आज भी वहां कुर्सी पर बैठकर ही एक हाथ से टीका लगाया जा रहा है। कहा जाता है: ऐसे ही लगाते हैं। कोई बात नहीं...महिला का स्वास्थ्य कैसा है: डॉ.मालवीय इस संबंध में जब जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ.मालवीय से चर्चा की गई तो उन्होने पूछा: महिला का स्वास्थ्य कैसा है? ठीक तो है? चलेगा, चार दिन बीत गए और कोई रिएक्शन नहीं हुई तो। कोई बात नहीं ? इस प्रश्न पर कि अब महिला को दोनों डोज का प्रमाण पत्र कैसे मिलेगा? उन्होने कोई जवाब नहीं दिया। हिंदुस्थान समाचार/ललित ज्वेल