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मध्य-प्रदेश

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण-संवर्धन में मील का पत्थर साबित होगा इंगांराविः निशंक

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अनूपपुर, 22 फरवरी (हि.स.)। आज का दिन किसी भी संस्थान एवं वहां शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्याथयों के लिए गौरव का दिन होता है। यह दिन जीवन एवं कर्म पथ पर आगे बढऩे का प्रस्थान बिंदु भी होता है। आप आत्मनिर्भर भारत जो कि प्रधानमंत्री का सपना है, के कारण और कारक दोनों हैं। आपके ही द्वारा भारत ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार के क्षेत्र में आगे बढक़र वैश्विक फलक पर सशक्त भारत के रूप में स्थापित होगा। शिक्षा के माध्यम से जनजातीय कला संस्कृति, भाषा, ज्ञान, विज्ञान को लोकल से ग्लोबल भारत बनाने की दिशा में विश्वविद्यालय एवं यहां के शिक्षक महती भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। स्थानीय वनोपज को तकनीकी माध्यम के द्वारा प्रचारित एवं विपणन हेतु विश्वविद्यालय निरंतर प्रयत्नशील है। जिससे यहां के जनजातीय समुदाय का विकास हो रहा है और समग्र विकास की संकल्पना साकार हो रही है। यह बात सोमवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में तृतीय दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि भारत सरकार के शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कही। तृतीय दीक्षांत समारोह बेबीनार के माध्यम से हुआ। जिसमे विशिष्ट अतिथि अध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली प्रो.डीपी सिंह रहे। शिक्षा मंत्री ने बिरसा मुंडा जी को याद करते हुए कहा कि देश प्रेम की ललक एक दैवीय वरदान है जो मनुष्य को उत्सर्ग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय निवासियों के विकास हेतु किए जा रहे विभिन्न कार्यों जैसे गांवों को गोद लेकर विकसित करना, जीविका उपार्जन व नवाचार केंद्र के कार्यों, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन हेतु किए जा रहे कार्यों आदि की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय में चिकित्सालय एवं चिकित्सा विज्ञान संकाय से सम्बद्घ नवाचार एवं रोजगार परक शिक्षा के अवसरों की वृद्घि के लिए घोषणाएं कीं। उन्होंने विश्वविद्यालय स्थापना का उद्देश्य जनजातीय विद्याॢथयों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अवसर प्रदान कर उन्हें देश के विकास से जोडऩा तथा उनकी कला व संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन करना है। प्रसन्नता है कि कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विष्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष कहा कि आज ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान के जिस उद्देश्य से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विष्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प लिया गया था, वह पूरा होता हुआ दिख रहा है। शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का कार्य होता है। विष्वविद्यालय की युवा शक्ति सद्मार्ग और मूल्यपरक शिक्षा व आचरण द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 को सफल बनाकर भारत को वैष्विक फलक पर गौरवान्वित करने में सफल हो, यही मेरी शुभकामनाएं हैं। हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश शुक्ला