ऑनलाइन मीडिया के लिए अलग कंटेंट निर्माण की चुनौती है: भूपेंद्र चौबे

ऑनलाइन मीडिया के लिए अलग कंटेंट निर्माण की चुनौती है: भूपेंद्र चौबे
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भोपाल, 24 मार्च (हि.स.)। डिजीटल मीडिया के विस्तार से कंटेंट कन्जंप्सन बहुत ही पर्सनालाइज हो गया है। मीडिया हाउसेज को प्रसारण माध्यम के साथ ही अब ऑनलाइन मीडिया के लिए भी उपयोगी कंटेंट तैयार करने की आवश्यकता है। यह बात बुधवार को “ब्रॉडकास्ट मीडिया के बदलते आयाम” विषय पर आयोजित हो रही अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ सत्र में वरिष्ठ संपादक भूपेंद्र चौबे ने कही। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते मीडिया में स्थायी सफलता के लिए के लिए टार्गेट ऑडिएंस को ध्यान में रखकर ही कंटेंट तैयार करना होगा। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ बुधवार को हो गया। कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश की दिग्गज मीडिया हस्तियां बदलते मीडिया परिदृश्य पर अपने विचार रख रही है साथ ही अकादमिक एवं शोधार्थी मीडिया के विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.जी. सुरेश ने कहा कि आज का दर्शक कंटेंट की गुणवत्ता, भाषा, घटिया कंटेंट, सतही रिपोर्टिग के कारण इलेक्ट्रानिक मीडिया से विमुख हो रहा है और डिजीटल मीडिया की तरफ जा रहा है, पॉडकास्ट भी तेजी से आकार ले रहा है। टीएएम, टीआरपी, बार्क जैसी संस्थाओं पर भी आज विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिनका समाधान करने की आवश्यकता है। प्रो. सुरेश ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ब्रॉडकास्ट मीडिया की विश्वसनीयता, चुनौतियां और भविष्य को लेकर उठे प्रश्नों के उत्तर खोजे जाएंगे। कॉन्फ्रेंस में पहले तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता राजस्थान के प्रो. संजीव भनावत ने कहा कि मीडिया शिक्षा में शोध और अध्यापन की प्रविधि में परिवर्तन आया है। मीडिया पाठ्क्रम को वर्तमान मीडिया उद्योग के अनुसार बनाने की आवश्यकता है, जिसमें विद्यार्थी और मीडिया दोनों का फायदा है। कोरोनाकाल में तकनीक ने शिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे शिक्षा में ऑनलाइन मीडिया की भूमिका बढ़ी है, लेकिन शिक्षण में गुरू का महत्व इसलिए रहेगा कि शिक्षक ही विद्यार्थीयों में छिपी रचनात्मकता को उभार सकता है। दूसरे तकनीकी सत्र में आकाशवाणी के सेवानिवृत स्टेशन डायरेक्टर डॉ. महावीर सिंह ने कहा कि प्रसारण माध्यम अपनी असीमित पंहुच के कारण आज भी प्रभावी है, इनमें शब्द के साथ अनुभूति, अर्थ और अन्य शक्तियां साथ होती है। ग्लोबल विलेज की संकल्पना, प्रसारण मीडिया के द्वारा ही साकार हो सकती है। तीसरे तकनीकी सत्र में टेलीविजन कंटेट के बदले आयाम पर बोलते हुए राज्यसभा टीवी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने कहा हम मीडिया में अभी अंधी सुरंग में हैं, लेकिन दूसरे छोर तक जरूर पहुंचेंगे। इसके लिए मीडिया शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की भूमिका अहम होगी। उन्होंने कहा कि आसान शॉर्टकट प्रवृत्ति से भारतीय टीवी समाचार चैनलों में गंभीरता, सार्थकता और प्रभावशीलता की कमी है, क्योंकि यहां समय, शोध और मेहनत से बचा जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/राजू

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