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मध्य-प्रदेश

झोलाछाप चिकित्सकों के कारण बिगढ़ रहा कोरोना पीड़ित मरीज का स्वास्थ्य

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मंदसौर, 14 अप्रैल (हि.स.)। जिले में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। बावजूद प्रशासन सहित जनता लापरवाह बनी है। हालात यह हैं कि सर्दी-जुकाम, बुखार को लेकर लोग पहले 5-7 दिन स्वयं का या फिर झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराकर गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। नतीजा रिकॉर्ड पॉजिटिव सामने आ रहे हैं। कई की तो रिपोर्ट निगेटिव आने बाद भी मौत हो रही है। पहले फेज में प्रशासन ने मेडिकल स्टोर संचालकों को सर्दी-जुकाम, बुखार की दवा बगैर डॉक्टर की सलाह के नहीं देने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा झोलाछाप पर कार्रवाई भी की थी। हाल ही में शामगढ़ में प्रशासन ने एक डॉक्टर के क्लीनिक को बंद कराया, लेकिन बाद में उसने फिर खोल लिया। इधर, मंगलवार को 77 नए पॉजिटिव मिले। अब तक कुल संक्रमित 3930 पर पहुंचे। वहीं एक्टिव केस 404 हो चुके हैं। सोमवार को जिले में अब तक के सबसे अधिक 116 पॉजिटिव मिले। स्वास्थ्य विभाग के जानकारों के अनुसार इसमें बड़ा कारण सर्दी- जुकाम, बुखार का इलाज मरीजों द्वारा या तो खुद ही करना है या फिर किसी भी झोलाछाप से करवाना है। मरीज पॉजिटिव होने के बाद भी 5-7 दिन घर पर इलाज करा रहे हैं। ऐसे में वे खुद की जान खतरे में डालने के साथ मिलने वालों व परिजन के लिए भी खतरा बन रहे हैं। कोरोना टेस्ट कराने के बाद भी होम आइसोलेट होने की जगह रिपोर्ट आने तक कामकाज में ही लगे हैं। इससे खतरा बढ़ता जा रहा है। पिछले साल प्रशासन ने की थी सख्ती, इस साल सब भूले, दे रखी है ढील कोरोना के प्रथम चरण में प्रशासन ने भी सख्ती दिखाते हुए संदिग्ध मरीजों को होम आइसोलेट करने के साथ मेडिकल स्टोर संचालकों को सर्दी-जुकाम की दवा बगैर डॉक्टर की अनुमति के नहीं देने के निर्देश दिए थे। वर्तमान में ऐसे कोई आदेश जारी नहीं किए और ना ही झोलाछाप या फिर बगैर सक्षम डिग्री के इलाज करने वालों पर कोई कार्रवाई की गई। जो लोग पॉजिटिव हैं उनके यहां भी कंटेनमेंट नहीं बनाए जा रहे, सिर्फ पर्ची चिपकाई जा रही है। वहां सख्त मॉनीटरिंग नहीं होने से ये लोग भी बाहर आ-जा रहे हैं और कोरोना बांट रहे हैं। बिना डिग्री चल रहा था क्लीनिक, बंद कराया लेकिन फिर से खुल गया शामगढ़ में 11 अप्रैल को नायब तहसीलदार सविता राठौर ने उर्दू स्कूल रोड स्थित डॉ. सगीर बेग के क्लीनिक पर कार्रवाई की। यहां सर्दी-जुकाम के मरीजों का इलाज चल रहा था। नायब तहसीलदार राठौर ने जब संबंधित से डिग्री मांगी तो नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने क्लीनिक बंद करा दिया। मंगलवार को फिर क्लीनिक खुल गया। बीएमओ मनीष दानगढ़ का कहना है कि झोलाछाप डॉक्टर नहीं मान रहे हैं और उन्होंने काम जारी रखा है जिस पर अधिकारियों को इसके लिए अवगत करवा दिया है। जल्द ही टीम बनाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी । लगातार बढ़ रहा संक्रमण, प्रशासन और जनता दोनों हैं लापरवाह - डॉ. चेलावत वरिष्ठ डॉ. प्रदीप चेलावत ने बताया कि कोरोना को लेकर लोग और प्रशासन दोनों लापरवाह हैं। मेरे यहां आने वाले हर 10 मरीज में से 9 पॉजिटिव निकल रहे हैं जब उसने कोरोना टेस्ट कराने का कहो तो वे नहीं कराते। आज सुबह ही सीतामऊ से एक मरीज आया जो कि पढ़ा-लिखा था, उसके साथ दो बच्चे भी थे। मरीज का ऑक्सीजन लेबल बहुत कम था। मैंने दोनों बच्चों सहित उसे जिला अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी। कोरोना को दो ही स्टेज से रोका जा सकता है। पहला लॉकडाउन, इसके बाद लोगों का इलाज करना। हिन्दुस्थान समाचार/ अशोक झलौया