जिला सहकारी बैंकों के विलय प्रस्ताव को लेकर सहकारिता नेताओं ने सीएम को पत्र

जिला सहकारी बैंकों के विलय प्रस्ताव को लेकर सहकारिता नेताओं ने सीएम को पत्र
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रतलाम, 11 जून (हि.स.)। प्रदेश की जिला सहकारी बैंकों को राज्य सहकारी बैंक में विलय किए जाने के निर्देश भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश के सहकारी नेता अपेक्स प्रेस भोपाल तथा जिला सहकारी बैंक रतलाम के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मेहरा तथा उज्जैन दुग्ध संघ के पूर्व उपाध्यक्ष एवं रतलाम सहकारी बैंक के पूर्व संचालक देवेन्द्र शर्मा ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को पत्र लिखकर जिला सहकारी बैंकों का विलय राज्य सहकारी बैंक में न होने देने का आग्रह किया है। श्री मेहरा तथा श्री शर्मा ने पत्र में बताया कि कई प्रदेश स्तरीय सहकारी संस्थाएं मृतप्राय हो चुकी है तथा किसानों को लम्बी अवधि के कर्ज उपलब्ध करवाने वाली संस्था जिसकों सामान्य भाषा में भूमि विकास बैंक के नाम से जाना जाता है भी परिसमापन में होकर वर्तमान में प्रदेश में किसानों को लम्बी अवधि का कर्ज उपलब्ध करवाने के लिए अब कोई संस्था प्रदेश में नहीं है। आप के 17 वर्ष के कार्यकाल में सहकारी आंदोलन को पुष्ट करने के लिए आपने कई निर्णय लिए है, जिससे उक्त आंदोलन को मजबूती मिली है। विदित हो कि प्रदेश में किसानों को अल्पकालीन ऋण उपलब्ध करवाने हेतु त्रिस्तरीय व्यवस्था है, जिसके तहत किसान सेवा सहकारी संस्थाओं का सदस्य होकर उसके साख पत्र जिला सहकारी बैंकों से स्वीकृत कर उन्हें कर्ज दिया जाता है और जिला सहकारी बैंकों का सम्पूर्ण कार्य राज्य स्तरीय सहकारी बैंक के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में होता है। आपके संज्ञान में है कि मध्य प्रदेश में सहकारी आंदोलन को विधिसम्मत रूप से संचालित करने हेतु मध्य प्रदेश सहकारी समितियाँ अधिनियम प्रभावशील है, और 1962 से ही इस प्रदेश में अल्पकालीन ऋण वितरण किसानों को करने के लिए प्रदेश में त्रिस्तरीय सहकारी आंदोलन प्रभावशाली तरीके से कार्य कर रहा है। और इस आंदोलन ने प्रदेश में कई नेताओं को जन्म दिया है, जो अखिल भारतीय स्तर पर भी सहकारी क्षेत्र में म.प्र. का प्रतिनिधित्व करते रहे है। पत्र में बताया गया कि इस आंदोलन में कार्यरत कार्यकर्ताओं तथा नेताओं ने राजनीति में भी सक्रिय सहयोग प्रभावशाली तरीके से दिया है तथा कई बार यह मान्यता भी बनी है कि जिस दल की विचारधारा के नेताओं के हाथ में सहकारी आंदोलन की उक्त संस्थाएं होगी वे सरकार बनाने में प्रभावशाली भूमिका निभा सकेगे तथा कई अवसर पर उन्होंने आपके निर्देशन में इस कार्य को सफलता पूर्वक सम्पादित किया है। म.प्र. के लगभग सभी किसान उपरोक्त व्यवस्था के अन्तर्गत अल्पकालीन ऋण प्राप्त करते है, और यह उनके स्वभाव में सम्मिलित होकर सुविधाजनक व्यवस्था है। यदि आर.बी.आई. के दिशानिर्देशों को मान लिया जाता है तो उसके फलस्वरूप प्रदेश में कार्यरत सभी जिला सहकारी बैंकों का विलीनिकरण हो जावेगा, जिसके फलस्वरूप किसानों को अल्पकालीन ऋण प्राप्त करने में समय तथा अधिक व्यय वहन करना होगा, और जिला स्तर पर जिन सहकारी कार्यकर्ताओं को आपके नेतृत्व में आपने खड़ा किया है, व एक बड़ा केडर व कार्यकर्ता इस आंदोलन से बाहर हो जाएगे, जो प्रदेश के सहकारी आंदोलन को नुकसान पहुंचाने वाला होगा। उन्होंने बताया कि भारतीय रिर्जव बैंक के उक्त निर्देश 24 मई 21 के संदर्भ में इंदौर के एक दैनिक ने 28 मई के अपने संस्करण में इस संदर्भ में समाचार पत्र का प्रकाशन कर यह बताया है कि आर.बी.आई के (रिर्जव बैंक ऑफ इण्डिया) द्वारा इस बाबत् दिशा निर्देश जारी कर राज्य सरकारों की सहमति के उपरान्त इस कार्य को करने का निर्णय लेकर सभी सरकारों को इस बाबत् दिशानिर्देश जारी किए है। इतना ही नहीं भारत सरकार के रिर्जव बैंक (भारतीय रिर्जव बैंक) द्वारा 24 मई को सभी प्रदेशों की सहकारी बैंकों को दिशानिर्देश जारी कर बैकिंग रेगुलेशन एक्ट 2020 में धारा 44 ए तथा धारा 56 में संशोधन कर उसके प्रभाव 1 अप्रैल 21 को लागू कर दिए है, जिसके तहत दिसम्बर 2020 से उक्त परिपत्र द्वारा जिला सहकारी बैंकों का विलीनीकरण राज्य सहकारी बैंकों में किये जाने के निर्देश दिए गए है। उपरोक्त संदर्भ में हमारा आपसे आग्रह है कि यदि रिर्जव बैंक द्वारा ऐसा कोई दिशानिर्देश जारी कर राज्य सरकार की सहमति मांगी जाती है, तो आप उस दशा में इस पत्र में वर्णित सभी बिन्दुओं पर न केवल प्रशासनिक अधिकारियों से वरन कानून तथा जिला सहकारी बैंकों के पूर्व अध्यक्षों व इस आंदोलन से जुड़ी हुई अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी विचार विमर्श कर योग्य निर्णय ले। हमारा तो स्पष्ट मत है कि प्रदेश से इस त्रिस्तरीय ऋण वितरण व्यवस्था को पूर्व की तरह लागू किया जाना चाहिए, जो न केवल इस आंदोलन वरन् अन्य रूप से भी लागू होना सकारात्मक होगा। आप इस पत्र पर विचार कर योग्य निर्णय ले यदि आप इस बाबत हम से विचार व सूझाव की आवश्यकता महसूस करते हो तो हम इस बाबत् आपके निर्देशों के तहत विचार विमर्श हेतु व सुझाव देने हेतु उपलब्ध है। हिंदूस्थान समाचार / शरद जोशी