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मध्य-प्रदेश

जनगणना कर्मियों को नौ माह से नहीं मिला वेतन, आयोग ने लिया संज्ञान

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भोपाल, 20 जनवरी (हि.स.)। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने जनगणना के काम में लगे 500 से अधिक कर्मचारियों को नौ माह से वेतन न मिलने पर संज्ञान लिया है। इस मामले में आयोग ने मुख्य सचिव, म.प्र. शासन एवं प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, गृह विभाग से तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है। मानव अधिकार आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जनगणना और एनपीआर के काम के लिए प्रदेशभर में पिछले साल मार्च 2020 में 500 से अधिक कर्मचारियों को डेढ़ साल के लिए रखा गया था। इनमें तकनीकी सहायक और मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) वर्कर आदि शामिल हैं, लेकिन इन्हें पिछले 9 माह से वेतन नहीं दिया गया है। जनगणना स्थगित होने पर 4 अगस्त को इनकी सेवाएं भी समाप्त कर दी गई थी, लेकिन बेरोजगार हुए इन कर्मचारियों को अप्रैल से जुलाई माह तक के वेतन का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य से लेकर जिला जनगणना कार्यालयों में एमपीकॉन के माध्यम से 18 माह की अवधि के लिए इन्हें संविदा पर रखा गया था। तकनीकी सहायक को 20 हजार रूपए और एमटीएस वर्कर को 14 हजार रूपए प्रतिमाह वेतन पर नियुक्ति दी गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इनके वेतन के लिए कैंट केंद से बजट आवंटन हो चुका है। इसके बावजूद राज्य का गृह विभाग जिलास्तर पर भुगतान की मंजूरी नहीं दे पाया है। तर्क यह दिया जा रहा है कि प्रदेश में जनगणना का राज्य नोडल अधिकारी का पद खाली है। राज्य के गृह सचिव ही पदेन जनगणना के राज्य के नोडल अधिकारी होते हैं, जिन्हें जिलों को जनगणना से जुडा बजट मंजूर करने का अधिकार होता है। पर यह पद खाली पड़ा है। हिन्दुस्थान समाचार/केशव दुबे-hindusthansamachar.in