प्रताडित सीएसी के निधन के बाद बीआरसी को हटाया, सीएसी निलंबित, जनशिक्षक को सेवा समाप्ति का नोटिस

प्रताडित सीएसी के निधन के बाद बीआरसी को हटाया, सीएसी निलंबित, जनशिक्षक को सेवा समाप्ति का नोटिस
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गुना, 11 जून (हि.स.)। (अपडेट) विकासखंड शिक्षा कार्यालय में जहर खाने वाले सीएसी (जनशिक्षक) ने बीती रात भोपाल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस आशय की खबर जैसे ही गुना पहुंचे, वैसे ही जहां परिजनों और शुभ चिंतकों में शोक छा गया, वहीं शिक्षा विभाग के गलियारों में सन्नाटा छा गया तो मामले में आरोपित अधिकारी-कर्मचारी भी दहशत में आ गया। घटना को लेकर कर्मचारी भी लामबंद हो गए और उन्होंने ज्ञापन सौपकर दोषियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग की है, वहीं भोपाल से शिक्षक का शव शुक्रवार शाम को गुना पहुँचा। इस दौरान शव के साथ जयस्तम्भ चौराहे पर प्रदर्शन की सूचना था। जिससे भारी तादाद में पुलिस बल सक्रिय रहा। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। बाद में पुलिस सुरक्षा में शिक्षक की अंत्येष्टि हुई। गौरतलब है कि इस मामले में बीआरसीसी गुना और एमएलबी स्कूल के सीएसी पर जनशिक्षक को प्रताडि़त करने का आरोप है। इसको लेकर शिक्षक ने विभागीय अधिकारियों सहित कलेक्टर तक को लिखित में शिकायत दर्ज कराई थीं। जिसमें आत्महत्या के लिए विवश करने की बात तक दुखी होकर कही गई थी। शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। जिसकी परिणीती शिक्षक के निधन के रुप में सामने आई। सिर्फ चाबी दी, न रिकॉर्ड सौंपा न अन्य अधिकार दिए उल्लेखनीय है कि शासकीय माध्यमिक विद्यालय फतेहगढ़ में पदस्थ चंद्रभोलेश्वर श्रीवास्तव 20 फरवरी 21 को डीपीसी के आदेश के बाद गुना के एमएलबी स्कूल में सीएसी के पद पर पदस्थ हुए थे। तीन माह बीतने के बाद भी उन्हे सिर्फ कमरे के बाहर के दरवाजे की चाबी दी गई। किसी प्रकार का रिकॉर्ड या चार्ज नहीं सौंपा गया। न अन्य अधिकार दिए गए। जनशिक्षक ने इसकी शिकायत डीपीसी से लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखित में दर्ज कराई। शिकायत में उन्होने कहा था कि एमएलबी स्कूल में पहले से पदस्थ सीएएस ओमकार छारी द्वारा उन्हें बीआरसीसी शंभू सिंह सोलंकी के साथ मिलकर लगातार प्रताडि़त किया जा रहा है। इसका कारण उन्होने बीआरसी और सीएसी द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत आला अधिकारियों से करना बताया था। 3 जून को कलेक्टर को की थी शिकायत चंद्रभोलेश्वर श्रीवास्तव ने 3 जून को कलेक्टर को भी लिखित में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें 1 जून को डीपीसी को शिकायत करने का हवाला देते हुए कहा गया था कि वह अपने ऊपर हो रहे अत्याचार से परेशान हो चुके है। उनका पूरा परिवार आत्महत्या करने के लिए विवश हो सकता है। पत्र में उन्होंने अपने मूल संस्था या कहीं और पदस्थ करने का आग्रह भी किया था। शिकायत को गंभीरता से न लेते हुए औपचारिक रुप से कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए। जांच अधिकारी बीईओ एसएन जाटव को बनाया गया। बीईओ ने शिकायतकर्ता जनशिक्षक को बयान के लिए बुलाया गया था। इसी दौरान जनशिक्षक ने जहर खा लिया। जहर खाने के बाद शिक्षक को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनकी गंभीर हालत के मद्देनजर उन्हें भोपाल उच्च उपचार के लिए रैफर किया गया। जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। प्रकरण दर्ज करने की मांग घटना के बाद मध्य प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने प्रशासन को ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में घटना की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। वहीं मप्र कर्मचारी कांगे्रस द्वारा भी अध्यापक साथी की मौत पर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पहले दर्ज करें प्रकरण, फिर निकालेंगे शव यात्रा मामले को लेकर शिक्षक के परिजनों एवं समाजजनों में खासा आक्रोष देखने को मिला। शिक्षक के शिवाजी नगर स्थित घर पर जब उनकी शव यात्रा निकालने की तैयारी कर ली गई तो परिजन और समाजसेवी शव यात्रा नहीं निकालने पर अड़ गए। उनका कहना रहा कि मामले में पहले दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। इसके बाद ही शव यात्रा निकाली जाएगी। समाजजनों ने प्रभारी कलेक्टर विवेक रघुवंशी, डीपीसी सोनम जैन, एसडीएम अंकिता जैन एवं एएस टीएस बघेल से भी मुलाकात की। जिन्होने जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। बिलखते रहे परिजन, ह्दयविदारक रहा दृश्य शिक्षक का शव जैसे ही भोपाल से ऐम्बूलेंस के माध्यम से उनके शिवाजी नगर स्थित निवास पर पहुंचा तो मातम पसर गया। इस दौरान शिक्षक की पत्नी, बच्चे बिलखते रहे, वहीं अन्य परिजन भी संभाले नहीं संभल रहे थे। इसके साथ ही मोहल्लेवासियों की आँखें भी नम थीं। शिक्षक के भाई विश्ंम्भर श्रीवास्तव का कहना रहा कि अगर प्रशासन ने उनके भाई की तकलीफ को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लिया होता तो आज उनका भाई जीवित होता और उनका परिवार यूं बिखर नहीं गया होता। घटना को लेकर सभी में खासा आक्रोष देखने को मिला। सात दिवस में होगी जांच मामले को लेकर प्रभारी कलेक्टर विवेक रघुवंशी ने बताया कि बीआरसी शंभू सिंह सोलंकी को पद से हटाकर माध्यमिक शिक्षक बजरंगगढ़ पदस्थ किया है। उनके विरूद्ध निलंबन का प्रस्ताव राज्य शिक्षा केन्द्र को भेजा गया है, वहीं चंद्रमोलेश्वर श्रीवास्तव को प्रभार न देने वाले जनशिक्षक ओमकार छारी को निलंबित कर विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय बमोरी भेजा गया है। इसी क्रम में रामस्वरूप शर्मा संविदा सेवा लिपिक डीपीसी कार्यालय को गुना से हटाकर जनशिक्षा केन्द्र चांचौड़ा पदस्थ किया गया है। रामस्वरूप शर्मा को सेवा समाप्ति का नोटिस भी जारी किया गया है। प्रभारी कलेक्टर रघुवंशी ने बताया कि मामले की जांच को लेकर दो सदस्यीय जांच दल गठित किया है। दल में एसडीएम गुना तथा जिला शिक्षा अधिकारी को रखा गया है। यह दल सात दिवस में मृत्यु के पूर्व अपने कथन में चंद्रमोलश्वर द्वारा लगाये गए आरोप तथा 16 जनशिक्षकों द्वारा दिये गये ज्ञापन के बिंदुओं की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक