पश्चिम बंगाल की हिंसा के विरोध में उतरा अम्बेडकर विचार मंच

पश्चिम बंगाल की हिंसा के विरोध में उतरा अम्बेडकर विचार मंच
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शाजापुर, 28 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की घटनाओं को लेकर अंबेडकर विचार मंच एवं प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर दिनेश जैन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद से ही हिंसक घटनाओं का दौर जारी है जो कि इस लोकतांत्रिक देश में गलत है। ज्ञापन का वाचन करते हुए विचार मंच के हुकुमचंद धनगर ने बताया कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में स्वतंत्रता के पूर्व से ही निर्वाचन के माध्यम से जनप्रतिनिधियों तथा सरकारों का चयन होता रहा है। राजनीतिक मतभेद आरोप-प्रत्यारोप रैलिया सभाएं सब एक स्वस्थ परंपरा के अनुरूप होती हैं। विगत 70 वर्षों में केंद्र से लेकर राज्य ग्राम पंचायतों तक के चुनाव उच्च पदों को छोडक़र शांतिपूर्ण ही रहे हैं। अपवादों में केरल बिहार और पश्चिम बंगाल विशेष उल्लेखनीय रहे हैं, जहां चुनाव से पूर्व और चुनाव के दौरान राजनीतिक हिंसाएं होती हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान तथा उपरांत हुई हिंसा ने पिछले सभी रिकार्ड को ध्वस्त करते हुए एक भयावह रूप ग्रहण किया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद आरंभ हुई यह हिंसा अब तक निरंतर जारी है। ज्ञापन में बताया कि पहले सप्ताह में ही 3000 से अधिक गांवों में हिंसक घटनाएं हुई हैं। जिनमें 70000 लोग प्रभावित हुए हैं 3886 मकान और दुकान को क्षति पहुंची है। अनेक मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया है। तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने 39 महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया, इनमें से केवल 4 महिलाओं के साथ बलात्कार की पुष्टि हो पाई है, क्योंकि शेष की पुलिस ने मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया। सत्ताधारी पार्टी के विरोध में काम करने के अपराध में 2157 कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं। इन कार्यकर्ताओं के 692 परिजनों पर भी प्राणघातक हमले हुए हैं। 23 कि हत्या अब तक दर्ज हुई , इनमें से 11 एक दम निर्धन और अनुसूचित जाति व जनजाति के हैं तथा 3 महिलाएं हैं। अपने व परिवार की सुरक्षा के लिए 6779 कार्यकर्ता अभी बंगाल में ही अपना गांव व घर छोडक़र शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। 1800 से अधिक कार्यकर्ता आसाम में शरण लेने को विवश हुए हैं। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई कि भारत की अखंडता और संप्रभुता को खतरे में डालने वाले इस घटनाक्रम पर स्वत: संज्ञान में लिया जाए और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत निर्देशित करें कि वह राज्य सरकार को पीडि़त लोगों की भावनाओं से अवगत कराएं। राज्यपाल अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए प्रदेश सरकार को निर्देशित करें कि वह दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करें। प्रभावित लोगों को शीघ्र न्याय दिलवाने के लिए कार्य के साथ उचित मुआवजे की भी व्यवस्था करें। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए शीघ्र कठोर कदम उठाएं। हिंसा की सभी घटनाओं की केंद्रीय एजेंसी अथवा न्यायिक जांच हो और दोषियों तथा घटनाओं के पीछे लगी षड्यंत्रकारी शक्तियों संगठनों एवं व्यक्तियों की पहचान कर उन पर प्रकरण दर्ज किए जाएं। हिन्दुस्थान समाचार/मंगल नाहर/राजू

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