आस्थाः तपती दोपहरी में नंगे पैर और हाथों में चुनरी थामे पैदल चले जा रहे थे ग्रामीण

आस्थाः तपती दोपहरी में नंगे पैर और हाथों में चुनरी थामे पैदल चले जा रहे थे ग्रामीण
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गुना, 27 जून (हि.स.)। आस्था और श्रृद्धा की तस्वीर रविवार को एबी रोड पर दिखाई दी। तपती दोपहरी में नंगे पैर श्रद्धालु लगभग 350 फीट लंबी चुनरी लेकर माई के जयकारे लगाते पैदल चले जा रहे थे। इसके पीछे ग्रामीणों की मंशा सुख-शांति और गांव की खुशहाली की थी। चुनरी लेकर चलने वालों में पुरुषों के अलावा महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जो सिलावटी गांव से लगभग 55 किमी दूर सालय पहुंचेंगे, जहां माता को चुनरी चढ़ाई जाएगी। जिला मुख्यालय से लगभग आठ किमी दूर सिलावटी गांव से रविवार दोपहर करीब एक सैकड़ा ग्रामीण, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, 350 फीट लंबी चुनरी हाथों में थामे नंगे पैर पैदल आगे बढ़ रहे थे। इस दौरान सभी माता के जयकारे लगा रहे थे। यह ग्रामीण लगभग 55 किमी की दूरी तय करते हुए आरोन होते हुए सालय गांव पहुंचेंगे। चुनरी यात्रा में शामिल सिलावटी गांव के रमेश अहिरवार और बृजेश अहिरवार ने बताया कि सालय वाली माता को चुनरी चढ़ाने की मन्नात ग्रामीणों ने मांगी थी। इसका उद्देश्य सिर्फ गांव की खुशहाली और सुख-शांति बनाए रखने की है। हालांकि, गांव में कोरोना काल में भी किसी को संक्रमण का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने बताया कि माता के दरबार में जा रहे हैं, तो नंगे पैर और पैदल ही पहुंचेंगे। तपती दोपहरी में नंगे पैर चलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि माता के प्रति जो ग्रामीणों की आस्था है, उसके आगे किसी प्रकार की तकलीफ नहीं है। इसी तरह पैदल चलते हुए सालय गांव पहुंचेंगे, जहां माता को चुनरी चढ़ाई जाएगी। साथ ही माता से मन्नात मांगेंगे कि सुख-शांति बनी रहे और ग्रामीण खुशहाल रहें। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक

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