सौ वर्ष बाद आदिवासियों को किया जा रहा बेघर, लगाई प्रशासन से गुहार
सौ वर्ष बाद आदिवासियों को किया जा रहा बेघर, लगाई प्रशासन से गुहार
मध्य-प्रदेश

सौ वर्ष बाद आदिवासियों को किया जा रहा बेघर, लगाई प्रशासन से गुहार

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रीवा, 16 अक्टूबर (हि.स.)। जिले के गुढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम चैड़ियार निवासी आदिवासी तेजा कोल, सजीवन कोल, शंकर कोल द्वारा शुक्रवार को मीडिया से संयुक्त रूप से बात करते हुए बताया गया कि हम लोगों के पूर्वज लगभग 100 वर्ष से ज्यादा समय से एक ही जगह एक ही भूमि पर निवास कर रहे थे, जिनके बाद अब हमलोग उसी भूमि पर निवासरत हैं। अब सौकड़ों वर्ष बाद आज उन्हें उनके पुस्तैनी घर से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आदिवासी परिवार को सौ वर्ष बाद यह बताया जा रहा है कि हमलोग सौ वर्ष से ज्यादा समय से किसी शिववती विश्वकर्मा की जमीन में बसे हैं। इससे पहले कभी न तो शासन-प्रशासन और न ही शिववती द्वारा कोई आपत्ति की गई और न ही उक्त भूमि में कोई वाद-विवाद या दावा ही किया गया, अब सौ वर्ष के ज्यादा समय के बाद शिववती की ओर से आदिवासी परिवार को शासन प्रशासन बेघर करने में लगा है, जबकि उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया है कि अगर कोई व्यक्ति लगातार बगैर किसी आपत्ति के 12 वर्षों तक निजी जमीन में और 30 वर्षो तक सरकारी जमीन में काबिज है तो वह उस जमीन का मालिक हो जाता है और उसे शासन-प्रशासन द्वारा आवासीय पट्टा दे दिया जाता है, परन्तु ऐसा नही किया गया। आदिवासी परिवार ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि जहां पर उनके पूर्वज एवं वे निवासरत हैं उन्हें उसी भूमि मे यथावत रहने दिया जाये और उसी भूमि का आवासी पट्टा दे दिया जाए। आदिवासी परिवार के लोगों का कहना है कि हमारे पास इसके अलावा अन्य कोई भूमि नही है जहां पर हमलोग निवास कर सके, अगर हम लोगों को जबरन उक्त भूमि से बेदखल कर दिया गया तो हमारा पूरा परिवार बेघर हो जायेगा और दर-दर की ठोकरे खाने के लिये मजबूर हो जायेंगे। अगर जबरन शासन-प्रशासन के द्वारा हमलोगों को विवादित भूमि से बेदखल किया गया तो हम लोगों इसी भूमि में सामूहिक पूरे परिवार के साथ जान देने को मजबूर हो जायेंगे। हिन्दुस्थान समाचार / विनोद शुक्ल-hindusthansamachar.in