सागर: महिला समूहों द्वारा गोबर का बेहतर उपयोग, तैयार की दीपावली पूजन सामग्री किट
सागर: महिला समूहों द्वारा गोबर का बेहतर उपयोग, तैयार की दीपावली पूजन सामग्री किट
मध्य-प्रदेश

सागर: महिला समूहों द्वारा गोबर का बेहतर उपयोग, तैयार की दीपावली पूजन सामग्री किट

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सागर, 05 नवम्बर (हि.स.)। कोरोना संक्रमण का असर सभी वर्गों पर देखने को मिला है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित महिला समूहों ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपना अहम योगदान देते हुए कई उपयोगी सामग्रियां बनाईं और लोगों को सस्ते दामों में उपलब्ध कराईं। अब यह महिला समूह दीपावली की तैयारियों में जुट गए हैं। लॉकडाउन की परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करने वाले महिला समूहों ने अपनी आमदनी को जुटाने के लिए गोबर से भी नये विकल्प तलाश लिये हैं। सागर के सहायक जनसम्पर्क संचालक यशवंत सिंह बरारे ने बताया कि किसी ने गोबर के इतने बेहतर उपयोग सामग्री के बनाने के बारे में सोचा भी न होगा, जो इन ग्रामीण महिलाओं ने कर दिखाया है। अबकी बार हाथ की कलाकारी से बने दीपावली के पूजन के थाल मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी ओर गोबर से बने हुए सुंदर कलाकृत गणेश जी, शुभ-लाभ, श्री, शंख और दीपक आदि भी इनके हाथों ने अब गढ़ ली है। हम बाजार से फैक्ट्री मेड या आयातित सामग्री को खरीदकर अपने देश के पैसे को अंजाने ही विदेशों में भेज देते हैं, लेकिन इस बार विदेशी समान पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में आप दीपावली की सामग्री खरीदकर इन जरूरतमंदों की मदद करने के लिए आगे आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वावलंबी मध्य प्रदेश, स्वावलंबी भारत, आत्म निर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सपने को साकार करने में अब जिले के उपभोक्ताओं को आगे आने की आवश्यकता है। जिले के ग्रामीण स्व सहायता महिला समूहों द्वारा तैयार की गई दीपावली पूजन सामग्री किट में पूजन के योग्य महत्वपूर्ण सभी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हैं, जिन्हें आप वाजिब दामों में खरीदेंगे। गाय के गोबर से शुद्धता के साथ बनाये गये ये सभी सामान पूजनोपयोगी हैं। सागर जिले के ग्राम चितौरा की गीतांजलि स्व. सहायता समूह की महिलायएं विकासखण्ड सागर के गुरुमति स्व. सहायता समूह से जुड़ी ग्राम भैसा, विकासखण्ड देवरी के ग्राम झुनकू, सिलारी और क्षीर की जय मां बीजासेन, ओम, सखी सहेली समूह की महिलाओं ने पूजन थाल बनाकर इस किट में शामिल किया है। इनका कहना है सागर कलेक्टर दीपक सिंह का कहना है कि जिले में बेसहारा गायों के लिए निर्मित गो-शालाओं के संचालन का दायित्व महिला स्व. सहायता समूहों को सौंपा गया है। जहां ये महिलायें न केवल गौ-सेवा करेंगी बल्कि गोबर और गोमूत्र आधारित सभी उत्पादों को बनाकर इन इकाइयों को आत्म निर्भर बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रहीं हैं। महिला समूहों को आगे लाने के लिए जिला पंचायत के द्वारा हर संभव प्रयास जारी है। इसी कड़ी में इन ग्रामीण महिलाओं का क्षमता वर्धन कर उन्हें स्थानीय संसाधनों के उपयोग से उत्तम सामग्री निर्मित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश-hindusthansamachar.in