वामपंथी दलों का आरोप, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को लागू कर रही शिवराज सरकार
वामपंथी दलों का आरोप, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को लागू कर रही शिवराज सरकार
मध्य-प्रदेश

वामपंथी दलों का आरोप, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को लागू कर रही शिवराज सरकार

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भोपाल, 18 अगस्त (हि.स.)। मध्यप्रदेश की तीनों वामपंथी पार्टियों माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और सीपीआई (एमएल) ने प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को लागू करने का आरोप लगाया है। माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह, भाकपा के राज्य सचिव अरविन्द श्रीवास्तव और सीपीआई (एमएल) के राज्य सचिव गुरुदत्त शर्मा ने मंगलवार को जारी अपने संयुक्त बयान में कहा है कि सौदेबाजी से सत्ता में आई भाजपा की शिवराज सिंह चौहान सरकार एक ओर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का एजेंडा लागू कर रही है तो वहीं दूसरी ओर कारपोरेट घरानों के हितों को लागू करने वाली जनविरोधी नीतियों को अमल में ला रही है। वामपंथी दलों ने कहा है कि जब प्रदेश में कोरोना फैल रहा था, तब भाजपा सत्ता हथियाने में लगी थी। जब कोरोना की महामारी बढ़ रही थी, तब प्रदेश में न कोई मंत्रिमंडल था और न स्वास्थ्य मंत्री। भाजपा सरकार की इस दिशाहीनता के कारण ही प्रदेश में मरीजों की संख्या 50 हजार के करीब पहुंच गई है, जबकि एक हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई है। वामपंथी दलों ने कहा है कि यह सरकार पूरी तरह दिशाहीन है। चार माह में यह सरकार साढ़े पांच हजार करोड़ का कर्ज बाजार से महंगी दरों से उठा चुकी है। इसकी दिशाहीनता का इससे बड़ा सबूत यह है कि यह सरकार बिना बजट के चल रही है। इस सरकार ने पहले ही दिन सिंधिया की सम्पत्ति को लेकर चलने वाले सारे मुकदमों को वापस लेकर सौदेबाजी का खुलासा किया है। कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व विधायकों को न केवल अपना प्रत्याशी घोषित किया है, बल्कि 14 को तो मंत्री भी बना दिया। वामपंथी दलों का कहना है कि यह सरकार एक ओर जनविरोधी नीतियों को लागू कर रही है, दूसरी ओर कोरोना का बहाना बनाकर धारा 144 के तहत जुलूस, प्रदर्शन, सभा पर प्रतिबंध लगाकर प्रतिरोध की आवाज को दबा रही है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला तो इस हद तक है कि सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने पर ही पुलिस मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। श्रमिकों और कर्मचारियों का रोजगार खत्म हो गया है। निजी शिक्षण संस्थायें, गारमेंट्स उद्योग, परिवहन में रोजगार ठप हंै। महिला, दलित और आदिवासी उत्पीडऩ चरम पर है। इन सारे सवालों को लेकर वामपंथी दल आने वाले दिनों में व्यापक अभियान चलायेंगे और इसके लिए वामपंथी, धर्मनिरपेक्ष दलों और संगठनों को एकजुट करेंगे। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश-hindusthansamachar.in