मेटरनिटी वार्ड में बच्चा चोरी की अफवाह
मेटरनिटी वार्ड में बच्चा चोरी की अफवाह
मध्य-प्रदेश

मेटरनिटी वार्ड में बच्चा चोरी की अफवाह

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गुना, 17 जुलाई (हि.स.)। जिला अस्पताल की मेटरनिटी विंग के हालात सुधरने का नाम नही ले रहे हैं। जिसका ताजा उदाहरण शुक्रवार सुबह मेटरनिटी वार्ड में देखने को मिला। जब स्टाफ ने एक महिला को संदिग्ध अवस्था में पकड़ लिया। हालांकि महिला का कहना था कि वह तो खजूर बेचने आई थी। जबकि वार्ड के अंदर इस तरह से बाहरी व्यक्ति कोई भी चीज बेचने नहीं आ सकता है। उक्त महिला पर बच्चा चोरी के प्रयास का आरोप लगाया गया है। घटना के बाद मेटरनिटी स्टाफ ने उक्त महिला को अस्पताल चौकी के हवाले कर दिया। देखते ही देखते यह घटना पूरे वार्ड में आग की तरह फैल गई। जिसके बाद वार्ड में भर्ती प्रसूताओं व उनके परिजनों में डर का माहौल व्याप्त हो गया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी कई महिला व पुरुष मेटरनिटी वार्ड में मरीज व स्टाफ के सामान की चोरी कर चुके हैं। इनमें एक महिला सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो चुकी है। जबकि पुरुष चोर को स्टाफ ने ही दबोच लिया था। जिसे भी अस्पताल चौकी के हवाले कर दिया था। कुल मिलाकर बीते दो साल के दौरान मेटरनिटी वार्ड में कई संदिग्ध व्यक्ति पकड़े जा चुके हैं। लेकिन आज तक प्रबंधन ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए हैं। इसी वजह से मेटरनिटी विंग असुरक्षित स्थान के रूप में तब्दील हो चुका है। अस्पताल परिसर में बाहरी लोगों का डेरा जिला अस्पताल परिसर में मेटरनिटी वार्ड के पास स्थित डीईआईसी भवन के नीचे बाहरी व्यक्ति बीते कई माह से डेरा जमाए हुए हैं। इनमें एक अधेड़ महिला व पुरुष है। इनके साथ बच्चे भी हैं। जो पिछले काफी समय से डीईआईसी के बरामदे में रह रहे हैं। यहां पदस्थ स्टाफ व भर्ती मरीजों के अटैंडरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि यह महिला व पुरुष रात के समय में न सिर्फ मरीज अटैंडरों के सामान की चोरी करते हैं। बल्कि रात 12 बजे के बाद डीईआईसी भवन के खाली पड़े हिस्से का उपयोग अवैध गतिविधियों में तक किया जा रहा है। जिसकी शिकायत स्टाफ अस्पताल चौकी से लेकर एसपी तक पहुंचा चुका है। लेकिन अब इस मामले को पुलिस से लेकर अस्पताल प्रबंधन ने गंभीरता से नहीं लिया है। जिससे मरीज परिजनों के साथ-साथ स्टाफ में भी रोष है। - 10 से अधिक गार्ड, सीसीटीव्ही कैमरे फिर भी असुरक्षा जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए सरकार ने प्रबंधन को निजी कंपनी के माध्यम से 10 से अधिक सुरक्षा गार्ड मुहैया कराए हैं। जिनकी जिम्मेदारी प्रत्येक वार्ड में मरीज अटैंडरों की संख्या को नियंत्रित करना व बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही को रोकना है। यही नहीं सुरक्षा के लिहाज से सभी वार्डों के अंदर व बाहर सीसीटीव्ही कैमरे लगे हुए हैं। इसके बाद भी न तो चोरी की घटनाएं रुक रही हैं और न ही बाहरी संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक-hindusthansamachar.in