भोपाल जिले में भिक्षावृत्ति छोड़ 930 बच्चों का कराया पुनर्वास, 828 बच्चे जा रहे स्कूल
भोपाल जिले में भिक्षावृत्ति छोड़ 930 बच्चों का कराया पुनर्वास, 828 बच्चे जा रहे स्कूल
मध्य-प्रदेश

भोपाल जिले में भिक्षावृत्ति छोड़ 930 बच्चों का कराया पुनर्वास, 828 बच्चे जा रहे स्कूल

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भोपाल, 10 सितम्बर (हि.स.)। मध्यप्रदेश में बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए सरकार द्वारा कई कड़े कदम उठाये गये हैं, ताकि बाल भिक्षावृत्ति में कमी लाई जा सके। बाल भिक्षावृत्ति को छोडक़र शिक्षा की ओर बढ़ते बच्चों के उत्थान, शिक्षा और स्वास्थ्य के दृष्टिगत कई नवाचार किये गये हैं। महिला एवं बाल विकास समेत कई सामाजिक संस्थाएं इस दिशा में अपना ध्यान केन्द्रित कर बाल भिक्षावृत्ति जैसी कुप्रथा को दूर कर बच्चों के पुनर्वास के लिए कई कदम उठा रहे हैं, ताकि बच्चों का सर्वागीण विकास और रहन-सहन में बदलाव आ सके। भोपाल में इस दिशा में सराहनीय कार्य हुआ है। महिला एवं बाल विकास विभाग की संभागीय संयुक्त संचालक नकी जहां ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बाल भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों के पुनर्वास के लिए भोपाल संभाग में कई नवाचार और अभिनव प्रयास किये जा रहे हैं। भोपाल जिले में 930 बच्चों का सर्वे कर उनका पुनर्वास किया गया है। इन 930 बच्चों में 828 बच्चे अब विद्यालय जाते हैं। इनमें से 609 बच्चों के आधार कार्ड, 480 बच्चों के समग्र आईडी और 360 बच्चों को पात्रता पर्ची प्रदान की गई है। इसी तरह राजगढ़ जिले में 146 बच्चों में से 33 बच्चे अब विद्यालय जा रहें हैं इनमें से 76 बच्चों के आधार कार्ड, 29 बच्चों के समग्र आईडी कार्ड बनाये गये हैं। रायसेन जिले में 30 बच्चों में से 10 बच्चे अब विद्यालय से संबद्ध किये गये हैं। इनमें से 20 बच्चों के आधार कार्ड, समग्र आईडी और 30 बच्चों को पात्रता पर्ची प्रदान की गई है। सीहोर जिले में 17 बच्चे अब विद्यालय जाते है इनमें से 14 बच्चों के आधार कार्ड, 12 बच्चों के समग्र आईडी और 10 बच्चों को पात्रता पर्ची प्रदान की गई है और विदिशा जिले में 5 बच्चों के आधार कार्ड, 5 बच्चों के समग्र आईडी और 2 बच्चों को पात्रता पर्ची प्रदान की जा चुकी है। इस प्रकार भोपाल संभाग में कुल 1128 बच्चों का सर्वे कर भौतिक सत्यापन के आधार पर पुनर्वास किया है। इनमें से 888 को विभिन्न विद्यालयों से संबद्ध, 724 के आधार कार्ड, 546 के समग्र आईडी और 348 बच्चों के पात्रता पर्ची जारी की गई है। बच्चों के उत्थान और शिक्षा के लिये माता-पिता को भी रोजगार तथा शिक्षा के साथ जोड़ा गया हैं। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश/केशव-hindusthansamachar.in