भाई-बहन के प्रमुख पर्व रक्षाबंधन पर भी कोरोना की काली छाया
भाई-बहन के प्रमुख पर्व रक्षाबंधन पर भी कोरोना की काली छाया
मध्य-प्रदेश

भाई-बहन के प्रमुख पर्व रक्षाबंधन पर भी कोरोना की काली छाया

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हरदा, 23 जुलाई (हि.स.)। इस बार कोरोना महामारी का असर राखी के बाजार पर चौतरफा दिख रहा है। प्रावधान के कारण अभी तक बाजार बंद रहा। राखी त्यौहार को मात्र 10 दिन शेष है। चाइनीज राखी से परहेज एवं कोरोना महामारी से डरे सहमे के कारण बाजार में रौनकता की उम्मीद बहुत कम है। परिवहन के साधन बंद होने के साथ ही आने-जाने में एक डर ने सभी के उत्साह को ठंडा कर दिया है। दुकानदार भी बाजार में दम खास खास नहीं दिखने से दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। लिहाजा व्यापारियों को अब पिछले साल के बकाया स्टाक पर ही भरोसा है। कुल मिलाकर जिले के इस एक करोड़ से अधिक के कारोबार में भी पानी फिरता नजर आ रहा है। भाई-बहन के त्यौहार पर इस बार कोरोना का साया है, ऐसे में भाई की कलाई पर बांधी जाने वाली राखी का बाजार ठंडा पड़ा है। इसका कारण है बाजार में राखी का स्टॉक नहीं होना। अभी बाजार में पुराना स्टॉक ही है। जिले के व्यापारियों का कहना है कि यहां राखी की आवक प्रमुख रूप से दिल्ली से होती है और वहां रक्षाबंधन से तीन-चार माह पहले ही राखी का स्टॉक तैयार करवाया जाता है। मगर इस साल मार्च में लॉकडाउन लगने से सारे मजदूर अपने घर चले गए। अनलॉक हुआ है तो मजदूर ही नहीं है, अब थोड़ा बहुत माल तैयार हो रहा है। स्टाक की स्थिति महानगरों जैसी हरदा जिले में भी है, जहां काफी सारा राखी का पुराना स्टॉक पड़ा हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि 10 दिन बाद रक्षाबंधन होने के बाद भी बाजार में कोई चहल-पहल नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार आने के लिए लोगों के पास सार्वजनिक साधन नहीं है। लिहाजा बाजार में भी लोग कम ही पहुंचत रहे हैं। वैसे भी इस बार बहने भी इन्हीं समस्याओं के चलते मायके की ओर रुख कम ही करेंगी। जिसके पास साधन होगा वही मायके जाएंगी अथवा भाई अपने निजी साधनों से राखी बंधवाने बहना के यहां पहुंच जाएंगे । यही कारण है कि राखी रुमाल या मिठाई ही नहीं इस त्यौहार में होने वाले साड़ी, किराना खाद्य तेल व आवश्यक सामग्री का धंधा मंदा पड़ा हुआ है। बहनों की सुनिए - कोरोना महामारी के कारण राखी का त्यौहार फीका रहेगा । कोरोना के कारण लोग डरे सहमे हैं एक दूसरे से यहां जाना भी लोग पसंद नहीं कर रहे हैं, बस सेवा चालू नहीं है । सोना राजेश शर्मा, ब्लाक अध्यक्ष महिला कांगे्रस, खिरकिया । इस बार की राखि ऐतिहासिक होगी, बाजार तो सुने रहेंगे साथ ही बहनों का मायके आना भी कम होगा। कारण वाहन सेवा बंद है। सुष्मिता राजपूत, जिलाध्यक्ष, महिला कांग्रेस सेवादल, हरदा । अब राखी त्यौहार को गिने.चुने दिन शेष हैं जो बाहर हैं वह भी आ जा नहीं पा रहे हैं जिले के अंदर भी लोग यहां वहां आना जाना पसंद नहीं कर रहे हैं। ऐसा रहा तो राखी पर जाना संभव नहीं है । सुषमा हुकुमचंद्र बिल्लौरे, गृहणी, हरदा । क्या कहते हैं दुकानदार - कोरोना के चलते इस बार राखी को लेकर लोगो कोई उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है । बाजार में भी लोग राखी, रुमाल या अन्य सामग्री लेने नहीं आ रहे । कुल मिलाकर परिवारों के लिए इस बार यह त्यौहार फीका का ही रहने वाला है। त्रिलोकचंद दशोरे, व्यापारी । कोरोना ने अन्य सामग्री की तरह हमारे व्यापार को भी काफी प्रभावित किया है। पिछले सालों तक जहां इस समय लहंगा, दुपट्टा, सूट तथा डिजाइन वाली साड़ी खरीदने या तैयार कराने वालों की भीड़ रहती थी । वहां अब काफी कम ग्राहक ही आ रही है। मांगीलाल चैरसिया, टिमरनी । हिन्दुस्थान समाचार/प्रमोद सोमानी-hindusthansamachar.in