भगवान विश्वकर्मा सभी के आदर्श हैं, उन्‍हें किसी समाज में बांधा नहीं जा सकता
भगवान विश्वकर्मा सभी के आदर्श हैं, उन्‍हें किसी समाज में बांधा नहीं जा सकता
मध्य-प्रदेश

भगवान विश्वकर्मा सभी के आदर्श हैं, उन्‍हें किसी समाज में बांधा नहीं जा सकता

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दतिया, 17 सितंबर (हि.स.)। गुरुओं और ऋषियों को किसी जाति और समुदाय की सीमा में बांधा नहीं जा सकता, क्योंकि उनका संदेश किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं पूरी मानवता के लिए होता है। इसी तरह भगवान विश्वकर्मा किसी एक समाज के न होकर सभी के आदर्श हैं। उन्हें किसी समाज या वर्ग से नहीं बांधा जा सकता है। यह बात पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष बृजकिशोर बल्ले रावत ने भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवान विश्वकर्मा का पूजन करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा ने मानव को सुख-सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनेक यंत्रों व शक्ति संपन्न भौतिक साधनों का निर्माण किया। इन्हीं साधनों द्वारा मानव समाज भौतिक सुख प्राप्त करता रहा है। विश्वकर्मा का व्यक्तित्व एवं सृष्टि के लिए किये गये कार्यों को बहुआयामी अर्थों में लिया जाता है। आज के वैश्विक सामाजिक-आर्थिक चिंतन में विश्वकर्मा को बड़े ही व्यापक रूप में देखने की जरूरत हैं, कर्म ही पूजा है, आराधना है। इसी के फलस्वरूप समस्त निधियां अर्थात ऋद्धि- सिद्धि प्राप्त होती हैं। हिन्दुस्थान समाचार/संतोष तिवारी/राजू-hindusthansamachar.in