बैतूल: सागौन के पेड़ों पर स्कलेटिनाइर-डिफोलियटर कीट का प्रकोप
बैतूल: सागौन के पेड़ों पर स्कलेटिनाइर-डिफोलियटर कीट का प्रकोप
मध्य-प्रदेश

बैतूल: सागौन के पेड़ों पर स्कलेटिनाइर-डिफोलियटर कीट का प्रकोप

news

बैतूल, 24 जुलाई (हि.स.)। इन दिनों बैतूल जिले में शाहपुर, बरेठा, रानीपुर, बंजारीमाई वाले घाट से लेकर हनुमानडोल तक लगे सागौन को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे कि पतझड़ लग गया हो। इसके पीछे की वजह यह है कि सागौन के पेड़ों में पत्ते ही नहीं बचे हैं और उनकी ग्रोथ भी रूक गई है। यह सब हो रहा है कि स्कलेटिनाइर-डिफोलियटर नामक कीट के प्रकोप की वजह से। यह कीट सागौन के पत्तों को चट कर रहे हैं। यह स्थिति हर साल बारिश की लंबी खेंच होने और उमस अधिक होने के दौरान होती है। क्योंकि ऐसा मौसम स्कलेटिनाइर-डिफोलियटर कीटों के जन्म से लेकर उनके पनपने के लिए अनुकूल होता है। हर साल होती है ऐसी स्थिति पश्चिम वन मंडल के डीएफओ मयंक चांदीवाल ने शुक्रवार को हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में बताया कि बारिश के दिनों में हर साल सागौन के पेड़ों पर स्कलेटिनाइर और डिफोलियटर नामक कीट का प्रकोप होता है। यह कीट पेड़ के पत्तों को खाता है। यह बड़ी तेजी से फैलता है। इसे दवा का छिडक़ाव करके ही नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो सकता। इतने बड़े जंगल और ऊंचे पेड़ों पर दवा का छिडक़ाव कैसे किया जा सकता है? उन्होंने बताया कि इस वर्ष जल्दी बारिश शुरू हो गई और फिर बारिश में लंबा गेप हो गया जिसके चलते अत्यधिक उमस और गर्मी होने से किट का सागौन के पेड़ों पर ज्यादा प्रकोप हो गया है। उक्त प्रकोप तेज बारिश होने पर अपने आप ही खत्म हो जाएगा। इसके बाद पेड़ों पर दोबारा पत्ते आ जाएंगे। हालांकि श्री चाँदीवाल ने कहा कि सागौन के नए पौधों को ज्यादा नुकसान होता है। कीटों ने चट कर दिए सागौन के पत्ते पेड़ों पर कीट प्रकोप की अधिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जंगल में खड़े अधिकांश पेड़ों में एक भी पत्ता नहीं बचा है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो जंगल में पतझड़ आ गया है। पास जाने पर पता चलता है कि पत्तों में केवल उनकी मोटी शिराएं भी बची हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शिराओं को कीट खा नहीं पाते, इसलिए वे बच जाती हैं। जबकि पत्ते का नाजुक हरे रंग का हिस्सा पूरी तरह खत्म हो चुका है। यह स्थिति एक-दो नहीं, बल्कि सागौन के जंगल के हजारों पेड़ों की है। प्रकाश संश£ेषण क्रिया नहीं होने से पेड़ की ग्रोथ रूक जाती है। हिन्दुस्थान समाचार / विवेक / मुकेश-hindusthansamachar.in