बिजुरी भूमिगत खदान में पानी भरने पर पुराने कर्मचारी हटाए गए
बिजुरी भूमिगत खदान में पानी भरने पर पुराने कर्मचारी हटाए गए
मध्य-प्रदेश

बिजुरी भूमिगत खदान में पानी भरने पर पुराने कर्मचारी हटाए गए

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अनूपपुर, 15 सितम्बर (हि.स.)। बिजुरी भूमिगत खदान में पानी भरे माहभर से अधिक समय बीत गया। खदान में पानी भरने की लापरवाही में मुख्य प्रबंधक कार्मिक अधिकारी स्थापना एसईसीएल बिलासपुर ने सब एरिया मैनेजर सहित पांच अन्य खदान मैनेजर को हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया। वहीं अब नए सब एरिया मैनेजर और मैनेजर को खदान की सुरक्षा का जिम्मा सौंपकर खदान संचालन की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन नये अधिकारियों की पदस्थापना के बाद पानी निकासी को लेकर सुस्ती बरती जा रही है। गत 14 अगस्त से पूरी तरह बंद बिजुरी भूमिगत चार मंजिली खदान से पानी खाली नहीं कराया जा सका है। अधिकारियों का मानना है कि बी सिम और सी सिम के अंदर पानी निकासी के लिए लगे मशीनरी जैसे ही बाहर नजर आएंगे, उससे पानी निकासी करने पर मदद मिलेगी। वहीं लॉग बॉल एरिया के पानी खाली होने के बाद पानी निकासी के अन्य वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है, ताकि बी सिम के एरिया के पानी निकासी मशीनरी को बाहर निकाला जा सके। अनुमान है कि अब भी खदान के भीतर 200 फीट मोटा पानी भरा है। उल्लेखनीय है कि 50 वर्ष पुरानी राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित रोजाना 500 टन कोयला उत्पादन करने वाली बिजुरी भूमिगत खदान के ऊपरी हिस्से के अनेक स्थानों पर दरार आ गई थी, जिसका भराव कॉलरी प्रबंधक द्वारा नहीं कराया गया। परिणाम यह हुआ कि बरसात से पूर्व दरारों की होने वाली फिलिंग नहीं होने से बारिश का पानी दरारों के रास्ते सीधे भूमिगत खदान में पहुंचकर उपर तक भर आया। पानी के इस भराव में खदान के अंदर 300 फीट पानी भरा, जिसमें पानी निकासी सहित अन्य 50 करोड़ के संसाधन ने जलसमाधि ले ली। और कोयला खदान को आखिरकार बंद करना पड़ा। इसमें प्रति दिन कॉलरी को 10 लाख का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पूर्व में 158 कर्मचारियों को किया जा चुका है स्थानांतरण मुख्य प्रबंधक कार्मिक अधिकारी स्थापना एसईसीएल बिलासपुर ने 29 अगस्त को आदेश जारी करते हुए सबएरिया मैनेजर सहित खान मैनेजर को स्थानांतरण कर दिया था। जबकि इन अधिकारियों से पूर्व बिजुरी भूमिगत खदान के रिले ए,बी और सी स्तर के 158 अधिकारियों व कर्मचारियों स्थानांतरण अस्थायी रूप में आगामी आदेश तक के लिए बहेराबांध खदान के लिए किया गया था। जिसके बाद ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि अब यह खदान बंद हो जाएगा। बिलासपुर के तकनीकि टीमों के निरीक्षण उपरांत हसदेव क्षेत्र महाप्रबंधक द्वारा पानी निकासी के प्रयास किए गए, लेकिन इसमें भी उदासीनता के खदान का पानी बाहर नहीं निकाला जा सका है। खदान के अंदर पानी के भराव के साथ हवा की कमी में जहरीला ब्लैक डैम गैस (ठंडी गैस) का अधिक भराव हो गया है। इसके अंदर बिना सुरक्षा उपायों के उतरना खतरनाक बताया गया है। हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश शुक्ला-hindusthansamachar.in