बच्चों से जुड़े मामलों में हो संवेदनशील रिपोर्टिंग : डॉ. चौबे
बच्चों से जुड़े मामलों में हो संवेदनशील रिपोर्टिंग : डॉ. चौबे
मध्य-प्रदेश

बच्चों से जुड़े मामलों में हो संवेदनशील रिपोर्टिंग : डॉ. चौबे

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माखनलाल विश्वविद्यालय में बाल अधिकार संरक्षण पर हुआ ऑनलाइन व्याख्यान भोपाल, 21 नवम्बर (हि.स.) । बालक किसी भी राष्ट्र की पूंजी होता है और किसी भी राष्ट्र का भविष्य उस पर निर्भर होता है। बालक समाज का सबसे नाजुक हिस्सा भी होता है, जिसके अधिकारों का आसानी से हनन किया जा सकता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए बालकों के अधिकार बनाए गए हैं, ताकि उनका शोषण न किया जा सके। मीडिया के विद्यार्थी जब सक्रिय पत्रकारिता में आयें तो सुनिश्चित करें कि बच्चों से जुड़े मामलों में अत्यधिक संवेदनशील होकर अपनी रिपोर्टिंग करें। उनकी भावनाओं, संवेदनाओं के साथ ही उनकी निजता और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। यह विचार बाल कल्याण समिति, भोपाल के सदस्य डॉ. कृपा शंकर चौबे ने व्यक्त किये। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की ओर से शनिवार को ‘बाल अधिकार संरक्षण’ विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें बतौर मुख्य वक्ता के रुप में उपस्थिति डॉ. कृपा शंकर चौबे ने यूएनसीआरसी समझौता और जेजे एक्ट-2015 का उल्लेख करते हुए बालकों के अधिकार और उनका हनन करने के सम्बन्ध में सजा के प्रावधानों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े अधिकारों पर समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से अपील की कि वे बाल अधिकार संरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे को उठाएं और प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करें क्योंकि बालक का विकास होगा तो राष्ट्र का विकास होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि हमारा प्रयास रहता है कि पत्रकारिता के विद्यार्थी ऐसे विषयों के बारे में अधिक से अधिक जाने और उनके प्रति संवेदनशील हों क्योंकि पत्रकारिता के शिक्षण का अर्थ केवल संपादन और रिपोर्टिंग सीखना नहीं है, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील होना सीखना अधिक जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य समाज को जागृत करना ही है। हिन्दुस्थान समाचार / उमेद-hindusthansamachar.in