पूर्व मंत्री का सरकार पर गंभीर आरोप, कहा- इंदौर प्रशासन भाजपा का नौकर बन कार्य कर रही
पूर्व मंत्री का सरकार पर गंभीर आरोप, कहा- इंदौर प्रशासन भाजपा का नौकर बन कार्य कर रही
मध्य-प्रदेश

पूर्व मंत्री का सरकार पर गंभीर आरोप, कहा- इंदौर प्रशासन भाजपा का नौकर बन कार्य कर रही

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इंदौर, 16 सितम्बर (हि.स.)। मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और मीडिया विभाग के चेयरमैन जीतू पटवारी ने बुधवार को स्थानीय रेसीडेंसी कोठी के बाहर एक पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना ने समूचे मध्यप्रदेश में भयानक रूप अख्तियार कर लिया है, जिससे इंदौर सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उल्लेखनीय है कि जिस परिवार का सदस्य कोरोना संक्रमित हो रहा है उसकी पीड़ा को केवल वही परिवार समझ सकता है। अकेले इंदौर में ही कोरोना के कारण अब तक 473 मौतें हो चुकी हैं और यह आधिकारिक आंकड़ा है जो प्रशासन के द्वारा दिया गया है लेकिन वास्तविकता में इससे तीन गुना अधिक मौतें हुई हैं। इस दौरान पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इंदौर शहर का प्रशासन कोरोना से हो रही मौतों और संक्रमित लोगों की संख्या को सरकार के इशारे पर छुपा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि कोरोना के असली आंकड़ों को छुपाया जाए, जांच की केवल बातें की जाएं, भाषण दिए जाएं, लेकिन वास्तविकता में जांच न की जाए, प्रशासन वैसा ही कर रहा है। पटवारी कहा कि यह चिंतनीय है कि लगभग 400 पॉजिटिव केस इंदौर में रोज आ रहे हैं, इस हिसाब से कांग्रेस पार्टी का अनुमान है की दीवाली तक लगभग 50000 केस हो सकते हैं। केंद्र और राज्य सरकार कोरोना के इलाज के नाम पर डेढ़ लाख रुपए तक, प्रति मरीज, उन चिन्हित अस्पतालों को दे रहे हैं, जिनसे सरकार का एग्रीमेंट है। जीतू पटवारी ने निजी अस्पतालों पर कोरोना के नाम पर लूट का आरोप लगाते हुए कहा कि निजी अस्पताल जनता को सीधे लूट रहे हैं। सांवेर के प्रत्याशी और पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू जो कोरोना से लड़ाई लड़ चुके हैं, वह स्वयं और मेरे चाचा भी निजी अस्पतालों की इस लूट का शिकार हो चुके हैं, आम आदमी के हालात का तो आप केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं। प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल पूछा है कि सरकार ने निजी अस्पतालों को लूट की छूट दे रखी है। निजी अस्पताल 5 लाख या उससे अधिक में इलाज कर रहे हैं और सरकार ने डेढ़ लाख रुपए प्रति मरीज निर्धारित किए हैं, ऐसा क्यों? बिलों में अंतर का अनुपात इतना अधिक क्यों है? पूरी प्रक्रिया पर जिला प्रशासन ने आंख क्यों मूंद रखी है? हिन्दुस्थान समाचार/ नेहा पाण्डेय-hindusthansamachar.in