पुलिस के प्रति जनता का भरोसा हो रहा कम
पुलिस के प्रति जनता का भरोसा हो रहा कम
मध्य-प्रदेश

पुलिस के प्रति जनता का भरोसा हो रहा कम

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गुना, 22 सितंबर (हि.स.)। पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने को लेकर हर साल तरह-तरह के नवाचार किए जा रहे हैं। लेकिन कुछ मामलों में पुलिस की जरा सी लापरवाही व उदासीनता पीडि़त पक्ष में पुलिस के प्रति भरोसे को कम करने का काम कर रही है। यही वजह है कि जनता की नजर में पुलिस के प्रति विश्वास बढऩे की वजाए लगातार कम हो रहा है। क्योंकि पुलिस अधिकांश मामलों में सीधे एफआईआर न लिख आवेदन देने की बात कहती है। लेकिन उक्त आवेदन को गंभीरता से न लेते हुए उस पर कार्रवाई भी नहीं करती। इस तरह के एक नहीं बल्कि कई मामले सामने आ चुके हैं, जो शुरूआत में सामान्य विवाद लग रहे हों लेकिन बाद यही मामले हत्या में तक तब्दील हो चुके हैं। इन घटनाओं से समझें पुलिस की कार्यप्रणाली -28 जून को वाहन दुर्घटना में युवक की मौत के मामले में मधुसूदनगढ़ थाना प्रभारी आरपी वर्मा पर पीडि़त के पिता ने कथित लेनदेन के आरोप लगाए थे। इस मामले में वायरल वीडियो के आधार पर एसपी ने दीवान को निलंबित कर दिया था। -बजरंगगढ़ थाने में एक परिवार के साथ घर में घुसकर अभद्रता व पैसे मांगने के आरोप में एसपी ने 4 सिपाही पर लाइन अटैच की कार्रवाई अंजाम दी थी। इस मामले में पीडि़त महिलाओं ने विधायक से भी शिकायत की थी। -4 सितंबर को बूढ़ेबालाजी क्षेत्र में किराएदार से विवाद हुआ था। इस मामले में पीडि़त पक्ष का आरोप था कि सिटी कोतवाली ने उनकी एफआईआर नहीं लिखी, जिससे नाराज होकर दंपत्ति ने एबी रोड स्थित अजाक्स थाने के सामने चूहामार दवा खाकर आत्महत्या का असफल प्रयास किया था। पीडि़तों का यह भी आरोप था कि पुलिस ने फरियाद सुनने के वजाए धमकाया। -18 सितंबर को बजरंगगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ागिर्द में एक महिला की सिर कटी लाश मिली थी। इस मामले में पीडि़त पक्ष पुलिस के काफी देरी से पहुंचने से इतना नाराज था कि अगले दिन पीएम के बाद शव को हनुमान चौराहा पर रख एक घंटे तक जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कई बार पुलिस से तीखी नोंकझोंक भी हुई। -20 सितंबर की शाम करीब 7 बजे ग्राम खैराई खडक़पुर निवासी सहरिया दंपत्ति ने अपने 8 साल के बच्चे का शव कैंट थाने के सामने सडक़ पर रखकर अपना विरोध जताया था। क्योंकि पीडि़त पक्ष का कहना था कि उन्होंने 19 सितंबर को लिखित आवेदन देकर कंैट थाने को बताया था कि वह जिस व्यक्ति के यहां हरवाई करते हैं उसने मांगने के बावजूद बच्चे के इलाज के लिए पैसे नहीं दिए। लंबित शिकायतों में कोतवाली जबकि चालान में कैंट अव्वल जिले के कुल 17 थानों में जिला स्थित दो प्रमुख थानों की बात करें तो यह कुल दर्ज अपराधों से लेकर लंबित मामलों में यह अन्य थानों से काफी आगे हैं। थानों में दर्ज आंकड़ों को समझें तो सिटी कोतवाली में सबसे ज्यादा 530 शिकायतें लंबित हैं। जबकि कैंट थाने में 1447 चालान लंबित हैं। वहीं गुमशुदगी के मामले में कैंट थाना 88 गुमशुदगी के साथ सबसे आगे है। कोतवाली में भी 55 गुमशुदगी दर्ज हैं लेकिन दोनों ही थाने गुमशुदगी के मामलों का पता लगाने में जीरो हैं। किन मामलों में सीधे एफआईआर हो सकती है और किन में नहीं संज्ञेय अपराध में गिरफ्तारी के लिए पुलिस को किसी वारंट की जरूरत नहीं होती। यह गंभीर अपराध होते हैं जिनमें पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी होती है। इनमें पुलिस को जांच शुरू करने के लिए मजिस्ट्रेट से आदेश की अनिवार्यता नहीं होती। इनमें दुष्कर्म, हत्या, विधि विरुद्ध जमाव, सरकारी संपत्ति को नुकसान और लोकसेवक द्वारा रिश्वत लेना जैसे मामले शामिल हैं। संज्ञेय अपराध में सीधे एफआईआर दर्ज की जाती है। असंज्ञेय अपराध : किसी को बिना कोई चोट पहुंचाए किए गए अपराध असंज्ञेय की श्रेणी में आते हैं। इन मामलों में पुलिस बिना तहकीकात के मुकदमा दर्ज नहीं करती। साथ ही शिकायतकर्ता भी इसके लिए पुलिस को बाध्य नहीं कर सकता। अगर पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं करती तो ऐसी स्थिति में उसे कार्रवाई न करने की वजह को लॉग बुक में दर्ज करना होता है, जिसकी जानकारी भी सामने वाले व्यक्ति को देनी होती है। ऐसे मामलों में जांच के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश प्राप्त करना होता है। ऐसे मामलों में एफआईआर के बजाए एनसीआर फाइल होती है, जिसके बाद पुलिस तहकीकात करती है। एफआईआर दर्ज न हो तो क्या करें यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करे या टालमटोल करे तो सबसे पहले वरिष्ठ अधिकारियों के पास लिखित में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारी के कहने के बाद भी अगर एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दे सकते हैं। मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वो पुलिस को एफआईआर दर्ज करने को कह सकता है। मना करने पर हो सकती है कार्रवाई यदि कोई पुलिसकर्मी एफआईआर दर्ज करने से मना करे तो उस पर कार्रवाई भी हो सकती है। साथ ही उसे विभागीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में पुलिस वालों की जिम्मेदारी बनती है कि वो संज्ञेय अपराधों में एफआईआर दर्ज करें और असंज्ञेय अपराध में शिकायत लें और अगर मुकदमा दर्ज नहीं करते तो इसका कारण शिकायतकर्ता को बताएं। कोतवाली 2020 के पूर्व में लंबित अपराध : 25 2020 में कुल दर्ज अपराध : 787 कुल लंबित अपराध : 242 कुल लंबित मर्ग : 18 कुल लंबित चालान : 98 कुल लंबित शिकायत : 530 कुल गुमशुदगी : 55 बरामद : 00 लंबित वारंट की स्थिति गिरफ्तारी वारंट : 04 जमानती वारंट : 20 गिराफ्तारी वारंट : 352 कैंट थाना 2020 के पूर्व में लंबित अपराध : 33 2020 में कुल दर्ज अपराध : 871 कुल लंबित अपराध : 339 कुल लंबित मर्ग : 58 कुल लंबित चालान : 1447 कुल लंबित शिकायत : 32 कुल गुमशुदगी : 88 बरामद : 00 लंबित वारंट की स्थिति गिरफ्तारी वारंट : 11 जमानती वारंट : 21 गिराफ्तारी वारंट : 459 हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक / उमेद-hindusthansamachar.in