पीड़ित को एक माह में 10 हजार रुपये दें थाना प्रभारी, आयोग ने दिये निर्देश
पीड़ित को एक माह में 10 हजार रुपये दें थाना प्रभारी, आयोग ने दिये निर्देश
मध्य-प्रदेश

पीड़ित को एक माह में 10 हजार रुपये दें थाना प्रभारी, आयोग ने दिये निर्देश

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भोपाल, 16 अक्टूबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने टीकमगढ जिले के वर्ष 2018 के एक प्रकरण में थाना प्रभारी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति राशि के रूप में 10 हज़ार रूपये एक माह के अन्दर भुगतान करने की अनुशंसा की है। आयोग ने अपनी अनुशंसा में यह भी कहा है कि मध्यप्रदेश शासन, निरीक्षक नवल आर्य, थाना प्रभारी, थाना कोतवाली, जिला टीकमगढ़ के विरूद्ध अविलम्ब विभागीय जांच प्रारंभ करें एवं विभागीय जांच अधिकतम चार माह में नियमानुसार पूर्ण कर आयोग को भी सूचित करें। आयोग ने पुलिस महानिरीक्षक, सागर संभाग को निर्देश दिया है कि यदि निरीक्षक नवल आर्य क्षतिपूर्ति राशि के रूप में दस हज़ार रूपये का भुगतान एक माह के अन्दर पीड़ित को नहीं करते हैं, तो उनके वेतन से यह क्षतिपूर्ति की राशि काटकर पीड़ित आवेदक को भुगतान कर दी जाये। मानव अधिकार आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रकरण क्र. 4134/भोपाल/2018 में आवेदक प्रदीप अहिरवार ने आयोग को 15 मई 2018 को एक शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस टीकमगढ़ के कहे अनुसार वह 28 मार्च 2018 को दोपहर 12.05 बजे कोतवाली टीकमगढ़ में उसके शिकायती आवेदन पर कार्यवाही के संबंध में मिलने गया था। जहां पर चौकी प्रभारी, सहायक उप निरीक्षक परिहार से मिला। सहायक उप निरीक्षक परिहार ने कहा कि वे आवेदक के आवेदन पत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं करेंगे। वे भड़क गये और आवेदक की फाइल को थाना प्रभारी नवल आर्य के कक्ष में फेंकते हुए बोले कि मुझे इनके आवेदन पत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं करनी है। तब थाना प्रभारी द्वारा कहा गया कि कार्यवाही आपको ही करनी है। फिर भी वह कमरे से बाहर चले गये। तब आवेदक ने थाना प्रभारी नवल आर्य से कहा कि आप सहायक उप निरीक्षक परिहार पर कार्यवाही करें तथा उनसे यह लिखित में लें कि वे मेरे आवेदन पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं करना चाहते। तब थाना प्रभारी ने आवेदक से तेज आवाज तथा बेहद अभद्र व्यवहार करते हुए कहा कि ’’मैं कोई भी कार्यवाही नहीं करूंगा, तुझसे जो बनता है तू कर ले।’’ आवेदक ने अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस टीकमगढ़ को दोपहर 12.10 पर मोबाईल पर इस अभद्र व्यवहार की शिकायत की तब उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक, टीकमगढ़ से शिकायत करें। आवेदक ने यह भी बताया कि घटना की सीसीटीवी फुटेज थाना प्रभारी के कक्ष में रिकार्ड हुई है। आवेदक ने अपने आवेदन में थाना प्रभारी नवल आर्य द्वारा अभद्र व्यवहार करने तथा धमकी देने तथा सहायक उप निरीक्षक परिहार के द्वारा कार्य के प्रति लापरवाही बरतने, आवेदक के आवेदनों पर कार्यवाही नहीं करने तथा आवेदन पत्रों को फेंक कर चले जाने जैसे अभद्र आचरण के विरूद्ध उचित कार्यवाही नहीं करने पर पुलिस अधीक्षक, टीकमगढ़ तथा समस्त स्टाफ पर कार्यवाही करने का आयोग से निवेदन किया। इस आवेदन पर आयोग ने 21 मई 2018 को संज्ञान में लेकर पुलिस अधीक्षक, टीकमगढ़ से प्रतिवेदन मांगा था। पुलिस अधीक्षक, टीकमगढ़ ने अपने प्रतिवेदन में आवेदक द्वारा लगाये गये आरोपों के संबंध में कोई साक्ष्य न होने से आरोप प्रमाणित होना नहीं पाया। इस पर आवेदक से प्रतिक्रिया लेकर पुलिस अधीक्षक, टीकमगढ़ से पुनः प्रतिवेदन मांगा गया। पुलिस अधीक्षक, जिला टीकमगढ़ द्वारा पुनः प्रतिवेदन दिया गया कि तत्कालीन थाना प्रभारी कोतवाली नवल आर्य द्वारा अभद्र व्यवहार करने का तथ्य प्रमाणित नहीं पाया गया। आवेदक से पुनः प्रतिक्रिया मांगी गई, जिसमें कहा गया कि तत्कालीन निरीक्षक नवल आर्य द्वारा किये गये अभद्र व्यवहार की रिकार्डिंग थाना प्रभारी के कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड है। इस पर आयोग द्वारा नवल आर्य, निरीक्षक कोतवाली टीकमगढ़ के विरूद्ध अभद्र व्यवहार की शिकायत प्रथम दृष्टया साबित पाये जाने पर निरीक्षक नवल आर्य को ’’धारा 16, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993’’ का नोटिस दिया गया, जिसमें उन्हें अपने बचाव में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। साथ ही आयोग में 30 सितम्बर 2020 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया। परन्तु निरीक्षक नवल आर्य ने न तो सूचना पत्र धारा 16 का लिखित जवाब या स्पष्टीकरण भेजा और न ही आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कोई कथन दिया। इसपर आयोग ने यह कार्यवाही की है। हिन्दुस्थान समाचार/केशव दुबे/राजूू-hindusthansamachar.in