पिछले साल हुए नुकसान का मुआवजा मिला नहीं नए नुकसान का सर्वे जारी
पिछले साल हुए नुकसान का मुआवजा मिला नहीं नए नुकसान का सर्वे जारी
मध्य-प्रदेश

पिछले साल हुए नुकसान का मुआवजा मिला नहीं नए नुकसान का सर्वे जारी

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गुना, 10 सितम्बर (हि.स.)। किसानों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जिले के किसानों को बीते साल खरीफ फसल में हुए नुकसान का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। इस बार भी खरीफ फसल को बहुत नुकसान हो चुका है। हर बार की तरह इस बार भी फसल सर्वे की बात कहकर नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। अभी तक जो स्थिति सामने आई है, उसमें सबसे ज्यादा नुकसान पार्वती नदी से लगे गांव में सामने आया है। वहीं जिले के अन्य इलाकों में 40 से 50 प्रतिशत नुकसान सामने आ रहा है। किसानों की मानें तो खरीफ फसल में जितना नुकसान हुआ है उस हिसाब से फसल की लागत भी नहीं निकली है। बीते साल हुए नुकसान का मात्र 25 प्रतिशत ही हुआ भुगतान शासन-प्रशासन किसानों को किस तरह तकनीकी पेंच में उलझाकर भ्रमित कर रहा है। इसका एक उदाहरण है बीते साल खरीफ फसल हुए नुकसान के मुआवजा वितरण की स्थिति। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बीते साल खरीफ फसल में हुए नुकसान के बाद प्रशासन ने विभिन्न स्तर पर सर्वे कराया था। जिसके बाद सरकार ने बजट की कमी बताकर दो किश्तों में पीडि़त किसानों को मुआवजा राशि देने की बात कही थी। जिसके तहत पहली किश्त में 25 प्रतिशत राशि जबकि दूसरी किश्त में 75 प्रतिशत राशि किसानों को दी जानी थी। लेकिन यह दूसरी किश्त की राशि आज तक किसानों को नहीं मिली है। जबकि इस साल फिर से खरीफ फसल में हुए नुकसान का आकलन करने सर्वे शुरू हो गया है। किसानों द्वारा फसल बीमा भी कराया जा चुका है। कुल मिलाकर इस स्थिति में किसान अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहा है। क्योंकि न तो उसे पिछली बार का पूरा मुआवजा मिला और न वर्तमान फसल से यह उम्मीद है कि उसे रबी फसल की बोवनी में आर्थिक सहायता मिल पाएगी। प्रारंभिक सर्वे में यह आ रहा सामने गुना जिला इस समय न तो कम वर्षा वाले क्षेत्र में शामिल है और न अतिवर्षा में। जिले में पार्वती नदी क्षेत्र के इलाके में बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। यहां नुकसान का प्रारंभिक आकलन 100 प्रतिशत है। जबकि जिले के अन्य क्षेत्रों में सोबीयान को लगातार बारिश व कीटों के प्रकोप से 20 से 25 प्रतिशत नुकसान हुआ है। वहीं उड़द में 40 प्रतिशत नुकसान की जानकारी सामने आ रही है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन राजस्व टीम से कराया जा रहा है। जिसमें कृषि विस्तार अधिकारी, सरपंच, सचिव, ग्राम सेवक, पटवारी शामिल हैं। प्रारंभिक सर्वे मौके पर पहुंचकर आंखों से देखकर ही अंदाजा लगाया जाता है कि कितना नुकसान हुआ है। फाइनल रिजल्ट क्रॉप कटिंग के आधार पर लिया जाता है। यह आकलन राजस्व टीम के अलावा बीमा कंपनी का सर्वे दल भी करता है। इन रिपोर्ट के बाद ही तय होता है नुकसान के आधार पर मुआवजा। राजस्व अधिकारी के मुताबिक सामान्य औसत से कम उपज निकलने पर ही मुआवजा दिया जाता है। फैक्ट फाइल गुना जिले में किस फसल का कितना रकबा सोयाबीन : 253.138 हजार हेक्टेयर उड़द : 16.825 हजार हेक्टेयर हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक/राजू-hindusthansamachar.in