पहले माता-पिता से लिखवाकर लाओ कि कोरोना संक्रमण हुआ तो जिम्मेदारी हमारी
पहले माता-पिता से लिखवाकर लाओ कि कोरोना संक्रमण हुआ तो जिम्मेदारी हमारी
मध्य-प्रदेश

पहले माता-पिता से लिखवाकर लाओ कि कोरोना संक्रमण हुआ तो जिम्मेदारी हमारी

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गुना 22 सितंबर (हि.स.)। सरकार लगातार शासकीय विभागों को कोविड-19 अंतर्गत जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की लिखित हिदायत दे रही है। लेकिन विभागीय अधिकारी इनके प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे हैैं। यही कारण है कि अब तक सरकारी स्कूलों में कोरोना संक्रमण से बचाने कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। पहले की तरह ही इस समय बाहरी लोगों की आवाजाही सामान्य रूप से बनी हुई है। यह स्थिति तब है जब शासन ने 21 सितंबर से कक्षा 9 से 12 वीं तक के बच्चों को पढ़ाई से संबंधित मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए अभिभावकों की सहमति के बाद स्कूल आने की अनुमति दे दी है। जिसके बाद बच्चे कम संख्या में स्कूल पहुंचने लगे हैं। लेकिन ऐसे बच्चों की संख्या ज्यादा है जिन्हें मार्कशीट, टीसी या किताब की जरुरत है। जानकारी के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में आदेश जारी कर जिले के सभी सरकारी स्कूलों को 21 सितंबर से छात्र-छात्राओं को मार्गदर्शन देने की छूट दे दी है। लेकिन इसमें एक शर्त जोड़ दी है जिसके तहत बच्चों को अपने माता-पिता से स्कूल जाने की लिखित में अनुमति लेना अनिवार्य है। इसी शर्त का फायदा शिक्षक उठा रहे हैं। वे स्कूल में मार्गदर्शन लेने आने वाले विद्यार्थियों से पहले लिखित अनुमति लाने के लिए कह रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या और ज्यादा घट रही है। वहीं विद्यालय प्रबंधन का तर्क है कि उन्हें तो शासन की गाइड लाइन का पालन करवाना अनिवार्य है। - स्कूलों में यह मिली स्थिति शासन की गाइड लाइन के बाद कितने बच्चे स्कूलों में मार्गदर्शन लेने पहुंच रहे हंै तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रबंधन ने क्या इंतजाम किए हैं। इसकी पड़ताल करने मंगलवार को कई हायर सेकेंडरी स्कूलों में जाकर देखा। जहां एक भी स्कूल भी कोविड-19 संक्रमण से बचने के कोई इंतजाम नजर नहीं आए। - समय : 1.30 बजे, एमएलबी स्कूल एमएलबी हायर सेकेंडरी स्कूल में सभी शिक्षिकाएं व प्रिंसीपल मौजूद थीं। बच्चों की संख्या बहुत कम थी। इनमें इक्का दुक्का ही छात्राएं पढ़ाई से संबंधित मार्गदर्शन लेने आई थीं लेकिन जब शिक्षिकाओं ने उनसे कहा कि पहले आप अभिभावक की लिखित अनुमति दिखाएं जिसमें उन्होंने स्कूल आने की परमिशन दी है। यह सुनते ही छात्राएं बिना मार्गदर्शन के ही चली गईं। - समय : 1.45 बजे, उत्कृष्ट विद्यालय स्कूल में प्रिंसीपल मौजूद नहीं थे। एक कक्ष में सभी शिक्षक बैठे हुए थे। स्कूल प्रांगण में 5-6 बच्चे खड़े थे। जबकि कुछ बच्चे एक विंडो पर कॉपियां जमा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वह कॉलेज स्टूडेंट हैं। वहीं अन्य बच्चों ने बताया कि वह टीसी व मार्कशीट लेने आए हैं। शिक्षकों से जब पूछा गया कि मार्गदर्शन लेने आने वाले बच्चे आ रहे हैं क्या। जिस पर उनका कहना था कि अभी स्कूल में पूरक परीक्षाएं चल रही थीं इसलिए बच्चे नहीं आ रहे थे। 25 सितंबर के बाद बच्चों को बुलाया जाएगा। - समय : 2.00 बजे, हायर सेकेंडरी स्कूल स्कूल में शिक्षक मौजूद थे। लेकिन मार्गदर्शन लेने आने वाले बच्चों की संख्या न के बराबर थी। एक दो बच्चे आए तो उनसे अभिभावक की लिखित अनुमति मांगी तो वे वापस चले गए। वही टीसी व मार्कशीट लेकिन स्कूल में कहीं भी कोविड संक्रमण से बचने इंतजाम नजर नहीं आए। न तो मेन गेट पर स्क्रीनिंग की सुविधा थी और न ही सेनेटाइजर के इंतजाम दिखे। - समय : 2.08 बजे, कन्या उमावि कैंट स्कूल प्रांगण पूरी तरह सूना नजर आ रहा था। स्कूल के एक हिस्से में शिक्षिकाएं खड़ी होकर बात कर रही थीं। स्कूल का मुख्य कार्यालय खुला हुआ था। बच्चों के न आने का कारण पूछा तो बताया गया कि 25 सितंबर से सभी इंतजाम जुटाने के बाद बच्चों को बुलाया जाएगा। स्कूल के मेन गेट पर स्क्रीनिंग व सेनेटाइजर की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही सोशल डिस्टेंस का विशेष ध्यान रखा जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक-hindusthansamachar.in