पत्नी रात भर गिड़गिड़ाती रही लेकिन अस्पताल स्टाफ की नहीं जागी मानवता
पत्नी रात भर गिड़गिड़ाती रही लेकिन अस्पताल स्टाफ की नहीं जागी मानवता
मध्य-प्रदेश

पत्नी रात भर गिड़गिड़ाती रही लेकिन अस्पताल स्टाफ की नहीं जागी मानवता

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गुना, 23 जुलाई (हि.स.)। जिला अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला घटनाक्रम सामने आया है। जहां एक व्यक्ति सिर्फ इसलिए अपनी जिंदगी से हार गया क्योंकि उसकी पत्नी के पास पर्चा बनवाने के लिए पांच रुपये तक नहीं थे। पत्नी स्टाफ के समक्ष पूरे समय गिड़गिड़ाती रही लेकिन किसी की भी मानवता नहीं जागी। पर्चा के अभाव में न तो डॉक्टर ने उसे देखा और न किसी ने उसकी मदद करने का प्रयास किया। मजबूरीवश रातभर पत्नी अपने पति के पास बैठी रही। सुबह जैसे तैसे उसने किसी से पर्चा बनवाने के लिए पैसे मांग भी लिए तब भी स्टाफ ने यह कहकर मना कर दिया कि 9 बजे के बाद पर्चा काउंटर खुलेगा तब पर्चा बनेगा। यही देरी मरीज की जान पर बन आई और उसने दम तोड़ दिया। यह जानकारी लगते ही अस्पताल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही को छुपाने के प्रयास में मृतक व्यक्ति को वार्ड में ले जाकर रख दिया। थोड़ी देर में औपचारिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रबंधन के अमानवीय चेहरे को उजागर करने वाले इस मामले की जानकारी जब कलेक्टर को लगी तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए तत्काल सीएस को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जांच प्रतिवेदन पेश करने के आदेश दे दिए। जानकारी के मुताबिक अशोकनगर नगर जिले की शंकर कॉलोनी निवासी सुनील धाकड़ को गंभीर स्थिति में उसकी पत्नी आरती बुधवार देर शाम मालवाहक वाहन से जिला अस्पताल लेकर आ रही थी। लेकिन वाहन चालक ने उसे हनुमान चौराहा पर ही उतार दिया। ऐसे में उसे मजबूरीवश ऑटो से अपने पति को जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। आरती ने बताया कि जिला अस्पताल के पर्चा काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ने पर्चा बनवाने के लिए पैसों की मांग की। उसने बताया कि उसके पास इस समय इतने पैसे नहीं हैं। तुम अभी पर्चा बना दो ताकि इलाज शुरू हो सके, मैं थोड़ी देर में किसी से मांग कर तुम्हें पैसे दे दूंगी, लेकिन उक्त कर्मचारी, वहां मौजूद अस्पताल स्टाफ सहित अन्य लोगों में से किसी की भी मानवता नहीं जागी और किसी ने भी महिला की मदद नहीं की। मेरे पास मोबाइल भी नहीं था कि किसी पहचान वाले को बुला सकूं। किसी तरह सुबह एक व्यक्ति ने पर्चा बनवाने पैसे दे दिए लेकिन स्टाफ ने यह कहकर पर्चा बनाने से मना कर दिया कि पर्चा काउंटर 9 बजे के बाद खुलेगा। मैंने उन्हें यह भी बताया कि मेरे पति की हालत बहुत खराब है, अभी सांसें चल रहीं हैं, पर्चा बना दोगे तो डॉक्टर देख लेंगे। लेकिन पूरे 12 घंटे बाद भी इलाज न मिलने से सुनील ने दम तोड़ दिया। - कलेक्टर को सोशल मीडिया से मिली जानकारी जिला अस्पताल में 12 घंटे बाद भी इलाज के अभाव में हुई युवक की मौत के मामले को कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने तत्काल सिविल सर्जन डॉ एसके श्रीवास्तव को नोटिस जारी कर दिया। जिसमें कहा गया है कि मुझे सोशल मीडिया से यह ज्ञात हुआ है कि 22 जुलाई को रात्रि में जिला अस्पताल पहुंचे एक मरीज की कथित तौर पर चिकित्सा सुविधा प्राप्त न होने के कारण मृत्यु हुई है। उक्त घटना की बिन्दुवार जांच कर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि उस समय किस डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ व जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी ड्यूटी पर थे। - मासूम बेटा पिता के शव से खेलता रहा जिला अस्पताल स्टाफ के अमानवीय व्यवहार के कारण हुई सुनील की मौत के बाद अस्पताल परिसर में ऐसा दृश्य भी देखने को मिला, जिसे देखे बिना कोई नहीं रह सका। डॉक्टर द्वारा सुनील को अधिकृत रूप से मृत घोषित करने के बाद शव को वाहन में रख दिया गया। जहां उसका मासूम बच्चा पूरी घटना से बेखबर पिता के शव के साथ खेलता रहा। - टीबी का पेशेंट था सुनील, नहीं कराई कोरोना जांच बताया जाता है कि सुनील टीबी का मरीज था। जिसकी वजह से उसकी हालत ज्यादा खराब हो गई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइड लाइन के मुताबिक टीबी के गंभीर मरीजों को कोरोना संक्रमण का ज्यादा खतरा है। ऐसे में आमजन में चर्चा थी कि सुनील की कोरोना जांच के बाद ही शव परिजनों को दिया जाना चाहिए था ताकि उसकी पत्नी, बच्चे व अन्य परिजन संक्रमण का शिकार होने से बच जाएं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने अपनी परेशानी को दूर करने ऐसा नहीं किया। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक-hindusthansamachar.in