ट्रेनें-बसें बंद, कोरोना महामारी का भय में कैसे मनाएं रक्षाबंधन का त्यौहार
ट्रेनें-बसें बंद, कोरोना महामारी का भय में कैसे मनाएं रक्षाबंधन का त्यौहार
मध्य-प्रदेश

ट्रेनें-बसें बंद, कोरोना महामारी का भय में कैसे मनाएं रक्षाबंधन का त्यौहार

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रतलाम, 31 जुलाई (हि.स.)। कोरोना महामारी के चलते सारे त्यौहार फीके हो गए हैं। शासन भी चाहता है कि लोग भगवान की पूजा और त्यौहार अपने घरों में ही मनाए, लेकिन रक्षाबंधन का त्यौहार ऐसा है जिसमें बहने अपने मायके, भाई के घर पर जाना चाहती है और भाई अपने बहनों के घर पवित्र रक्षा सूत्र बंधवाने के लिए जाना चाहते हैं, लेकिन जाए कैसे ट्रेने बंद, बसे बंद और इन सबके साथ कोरोना महामारी का भय अलग। इन सबके बावजूद भी यह लोग अपने-अपने साधनों से दो पहिया वाहनों, चार पहिया वाहनों के माध्यम से यात्रा कर रहे हैं। कई लोग ऐसे है जो अपने परिवार से काफी दूर है। वे न तो कारों से आ सकते है और ना ही दो पहिया (बाइक ) वाहनों से घर पहुंच सकते हैं। कई सरकारी और निजी नौकरियों में है, जिनके पास भी साधन न होने से वे अपने घरों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि ऐसा दिन भी आ सकता है जिस दिन लोग अपने परिवार से काफी दूर है, मिल-जूल भी नहीं सकते। शादी समारोह अन्य पारिवारिक कार्यक्रम भी कोरोना की महामारी में लोग भुल चुके है। 10-20 लोगों के बीच यह समारोह आयोजित हो रहे है, इससे लगता नहीं कि कोई पारिवारिक कार्यक्रम हो रहा है। एक तरफ लोग आर्थिक संकट से जुझ रहे है, बेरोजगारी का आंकड़ा निरंतर बड़ रहा है, कई सरकारी कार्यालयों में भी दो-तीन माह से वेतन नहीं मिल पाया है, निजी स्कूलों और कार्यालयों की हालत तो काफी बदतर है। व्यापार व्यवसाय भी नहीं के बराबर है। बाजार खुल रहे है लेकिन रौनक नहीं है और ना ही दुकानों पर ग्राहक है। साडिय़ों की दुकानों पर भी भीड़ नहीं है। दुकानदारों का कहना है कि पहली बार ऐसा मौका आया है जब ग्राहकों के अते-पते नहीं है, नहीं तो हर साल बहन-बेटियों के लिए लोग खरीदी करते है। सर्वत्र स्थिति चिंतनीय है। आखिर ऐसा समय कब आएगा जब लोग हसी-खुशी त्यौहार मनाएंगे और अपने पारिवारिक कार्यक्रमों का लोग आनंद ले पाएंगे। हिन्दुस्थान समाचार/ शरद जोशी-hindusthansamachar.in