जिले के 22 परिवार संकट में, शासकीय योजना एक मात्र बची सहारा

जिले के 22 परिवार संकट में, शासकीय योजना एक मात्र बची सहारा
जिले के 22 परिवार संकट में, शासकीय योजना एक मात्र बची सहारा

अनूपपुर, 25 जुलाई (हि.स.)। वनपरिक्षेत्र के राजेन्द्रग्राम बम्हनी बीट कक्ष क्रमांक पीएफ 162 के अंतर्गत 25 हेक्टेयर वनभूमि पर गत 22 जुलाई को वनविभाग द्वारा किए गए कब्जा से बेंदी और डूमरटोला के 22 परिवारों पर भरण पोषण का खतरा मंडराने लगा है। बेंदी ग्राम की 2300 की आबादी में 60 आदिवासी समुदाय के विशेष श्रेणी में शामिल बैगा परिवार यहां खेती और लकड़ी काटकर अपना गुजारा करते हैं। वनविभाग का दावा है कि वह वनविभाग की जमीन है जिसपर ग्रामीणों ने अवैध तरीके से कब्जा कर खेती कर रहे हैं, लेकिन आश्चर्य जिस जमीन पर बैगा समुदाय के 22 परिवार खेती कर रहे हैं, उसका राजस्व विभाग पुष्पराजगढ़ द्वारा प्रत्येक दो-तीन साल में जुर्माना के रूप में लगान भी वसूल कर रही है। यहां तक राजस्व विभाग जिस जमीन खसरा नम्बर 183 को अपना बताकर ग्रामीणों से 1000-1500 रूपए जमीन के टुकड़ों के अनुसार उसका रसीद भी काटकर थमा रही है। ग्रामीण लम्टू बैगा बताते हैं कि वे लगभग 20 वर्षो से इस जमीन को जोतकर खा रहे हैं। यहां राजस्व विभाग द्वारा रसीद दिया जाता रहा है। आजतक कभी राजस्व विभाग या वनविभाग द्वारा आपत्ति नहीं जताई गई। वहीं झड़हू बैगा बताते हैं कि वे 20-25 साल से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। घर में पांच सदस्य है, जिनका गुजारा इसी खेती और आसपास के खेतों में अधिया कर होता है। अचानक वनविभाग ने इसे अपना जमीन बताते हुए उसपर कब्जा कर लिया और उसकी फेंसिंग भी कर डाली। बैगा परिवार हाथ जोड़कर विनती करते रहे, लेकिन अधिकारियों ने एक न मानी। यहां तक कि ट्रैक्टर से फसलों को कुचल दिया, आवारा पशुओं को खेतों में छोड़कर फसल खिला दी। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग के अधिकारी जब भी साल-दो साल में एक बार आते है और लगान की राशि लेकर जाते हैं। एक जमीन राजस्व व वनविभाग की कैसे बेंदी और डूमरटोला में बैगा परिवारों द्वारा खेती किए जाने वाला जमीन खसरा नम्बर 183 जब राजस्व विभाग की थी और वह उसका लगान वसूल रहा था तो वनविभाग की जमीन कैसे हो गई। लगभग 20-25 साल से राजस्व विभाग द्वारा दिया गया रसीद वनविभाग के सामने झूठी हो गई। ग्राम सरपंच नेपाल सिंह बताते हैं कि जमीन वनविभाग के मुनारा के भीतर है। लेकिन आजतक वनविभाग ने कभी उसपर कब्जा नहीं दिखाया। इन परिवारों पर गहरा संकट के बादल खेती से वंचित हुए परिवारों में फागु, मंगलू, खल्दू, ललन, रामसिंह, नानकू, दरवारी, दुर्जन, चारू, जगपाल, सन्नू, लाल सिंह,भरसू, लम्टू, भूरसू, बिरसू, फूलचंद्र, अजयपाल, अकालू, करण, शक्लू, शिवराम, चैतू सहित अन्य है। बेंदी सरपंच नेपाल सिंह का कहना है कि यह ग्रामीण कई दशकों से यहां खेती करते आ रहे हैं। राजस्व विभाग द्वारा इनसे लगान भी लेती है और रसीद भी देती है। लेकिन वह जमीन वनविभाग के मुनारा के भीतर आता है। अब वनविभाग ने उसपर कब्जा जमा ली है। यह तो जांच का विषय है कि जब राजस्व लगान ले रहा है तो वनविभाग की जमीन कैसे हो गई। एसडीएम पुष्पराजगढ़ विजय कुमार डहेरिया ने बताया कि संभागायुक्त की ओर से जांच के निर्देश दिए गए हैं, भूमि का नए सिरे से सीमांकन किया जाएगा। राजस्व विभाग द्वारा अबतक लगान लेकर रसीद भी दे रही थी इसकी भी जांच की जाएगी। सीसीएफ वृंत शहडोल पीके वर्मा ने कहा कि संयुक्त सीमांकन की कार्रवाई की जानी है। मैप के अनुसार जमीन हमारी है, लेकिन अभिलेख के माध्यम से भी जांच की जाएगी। एसडीएम पुष्पराजगढ़ जांच करेंगे, जो रिपोर्ट आएगी उसी के आधार पर आगे सीमांकन होगा। हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश शुक्ला-hindusthansamachar.in

अन्य खबरें

No stories found.