ग्वालियर: सफाईकर्मी 21 सितम्बर से नहीं करेंगे काम
ग्वालियर: सफाईकर्मी 21 सितम्बर से नहीं करेंगे काम
मध्य-प्रदेश

ग्वालियर: सफाईकर्मी 21 सितम्बर से नहीं करेंगे काम

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ग्वालियर, 10 सितम्बर (हि.स.)। लंबे समय से अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर निगमायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक से मिलकर मांगे पूरी करने को लेकर गुहार लगा चुके सफाई कर्मचारियों का गुस्सा नगर निगम के साथ ही शहरवासियों को भी भारी पड़ सकता है। यदि यह अपनी जिद पर अड़े रहे तो त्योहारी सीजन में शहर में हर ओर कचरा पसरा दिखाई देगा, क्योंकि आने वाली 21 सितम्बर से सफाई कर्मियों ने बेमियादी हड़ताल का बिगुल फूंकते हुए खुद को काम से अलग करने की घोषणा कर दी है। यानि आने वाले समय में लोगों की दिक्कत बढ़ सकती हैं। भारतीय मजदूर संघ राज्य सफाई कामगार मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष व ग्वालियर-चंबल संभाग प्रभारी सीताराम खरे ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि निगम द्वारा छोटे कर्मचारियों का लगातार शोषण किया जा रहा है, ऐसे में मजबूर होकर हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा है। इसके चलते 17 सितंबर को शाम चार बजे निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन व नारेबाजी, 18 सितंबर को धरना और 21 सितंबर से बेमियादी हड़ताल शुरु कर दी जाएगी और कोई भी सफाई कर्मचारी काम पर नहीं आएगा । हड़ताल का फैसला सर्व सम्मति से लिया गया है, जिसमें दो सैकड़ा से अधिक पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे। इस हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी। हड़ताल सफल बनाने की अपील: अरविंद मिश्रा, प्रदेश मंत्री भारतीय मजदूर संघ नारायण करौसिया, डब्ल्यूएचओ सफाई मित्र संघर्ष मोर्चा जिला अध्यक्ष सीताराम खरे प्रदेश उपाध्यक्ष भारतीय मजदूर संघ सफाई कामगार मोर्चा राजेंद्र मौर्य विशन पारछे गुलाब घारोन, वीरेंद्र करोसिया रघुवीर खरे मध्यप्रदेश, डब्लू एच ओ ताराचंद पवार, राजेंद्र पारछे, राजकुमार कड़ेरे गोरी दास बिहारी अनिल धौलकर राजेंद्र करौसिया, राजकुमार चौहान, कृष्णपाल मेहता, रघुवर दीवान, अजीत मेवाती, रामचंद्र धौलपुरिया आदि ने सभी कर्मचारियों से हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है। मांग पत्र में डब्ल्यूएचओ पर सफाई के अलावा जो काम कराया जा रहा है वह खत्म किया जाए, डब्ल्यूएचओ व सफाई कर्मचारियों का काम 8 घंटे निर्धारित किया जाए। सफाई कर्मचारियों को सातवें वेतन का एरियर का भुगतान किया जाए, क्योंकि सुपरस्टाफ को सातवें वेतन का भुगतान किया जा चुका है एवं सफाई कर्मचारियों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। शेष बचे सफाई कर्मचारियों का फिक्सेशन किया जाए आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन बंद कर दिया गया है एडवांस के जरिए जो पैसे दिए जा रहा है वह ठीक नहीं एडवांस बंद कर पूरा वेतन दिया जाए, वेतन सेल का गठन किया जाए ताकि सफाई कर्मचारियों को हर महीने हो रही परेशानियों से निजात मिल सके, मध्यप्रदेश शासन द्वारा कोरोना योद्धाओं को 10000 रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई थी, जिसका भुगतान आंगनबाड़ी के सभी कार्यकर्ताओं को किया जा चुका है लेकिन सफाई कर्मचारियों का आज दिनांक तक भुगतान नहीं किया गया है । जिन्होंने रात-दिन मेहनत कर कोरोना जैसी महामारी में अपने परिवार की जान की परवाह ना करते हुए काम किया इन कर्मचारियों को 10000 की राशि तुरंत दी जाए । विनियमित कर्मचारियों को जिनके 10 साल पूरे हो चुके है उनको परमानेंट किया जाए, मध्य प्रदेश शासन के अनुसार ठेका प्रथा खत्म कर ठेका कर्मचारियों को निगम में सम्मिलित किया जाए। राष्ट्रीय छुट्टियों का पेमेंट किया जाए। गल्ला लोन तत्काल दिया जाए। विनियमित एवं ठेका प्रथा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को एक या दो अपसेंट पर हटा दिया जाता है, इन्हें तत्काल वापस लिया जाए। हिन्दुस्थान समाचार / श्याम / मुकेश-hindusthansamachar.in