कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद शासन-प्रशासन की सक्रियता ने शादी वालों के लिए बढ़ाई टेंशन
कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद शासन-प्रशासन की सक्रियता ने शादी वालों के लिए बढ़ाई टेंशन
मध्य-प्रदेश

कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद शासन-प्रशासन की सक्रियता ने शादी वालों के लिए बढ़ाई टेंशन

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रतलाम, 22 नवम्बर (हि.स.)। देवउठनी एकादशी पर 25 नवम्बर से सैकड़ों परिवारों में शादियां होनी है, इसी बीच रतलाम सहित प्रदेश के कई जिलों में रात्रि कालीन कर्फ्यू प्रभावशील हो गया है। सरकार के इस आदेश से शादी-समारोह की तैयारियां पूरी कर चुके लोगों में टेंशन उत्पन्न हो गया है। शादी के साथ ही रिसेप्शन और अन्य कार्यक्रम भी तय हो गए है। ऐसे में लोग क्या करें इस बात की चिंता सताने लगी है। बड़ी मुश्किल से गाड़ी पटरी पर आई थी,लगभग आठ माह तक आर्थिक संकट झेल रहे लोग जैसे-तैसे अपने परिवार का भरण-पोषण कर जीवन यापन कर रहे है, इसी बीच फिर कोरोना संक्रमण की तेजी से बड़ रही दस्तक ने लोगों को परेशान कर दिया है। चुनावी चक्कर के बाद राज्य सरकार भी अब काम में जुट गई है। उसे लगने लगा है कि कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण कैसे किया जाए, राजनैतिक चौसर बिछाने के चक्कर में राज्य सरकार ने जो छूट दी थी वह छूट अब समाप्त होने की संभावना प्रतीत होने से लोगों में फिर भय व्याप्त हो गया है। प्रशासन ने कई दिनों तक लोगों को छूट दी, सोशल डिस्सेंट की परवाह नहीं की और मास्क न लगाने वालों पर भी कार्रवाई नहीं की और ना ही संक्रमित मरीजों के घरों पर जो निगरानी की जाना थी, सुरक्षात्मक उपाय किए जाने थे वह नहीं किए उसका ही कारण है कि कोरोना संक्रमण का फैलाव फिर तेजी से होने लगा है, जिसका खामियाजा फिर उन लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है जो सोशल डिस्टेंस और मास्क नियमित रुप से लगा रहे है। प्रशासन की लापरवाही कहे या शासन की, जिसके कारण अब कोरोना संक्रमण फैल रहा है और शादी-समारोह और वैवाहिक कार्यक्रम तय होने के बाद जिन लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। होटल,मेरीज गार्डन संचालकों ने अनुमति के आधार पर रिसेपशन और शादी-समारोह की बुकिंग कर ली और लोगों ने भी अग्रिम राशि जमा करा दी। उनका अब क्या होगा। एन वक्त पर लोगों को शादी में आने से मना नहीं किया जा सकता। ऐसे परिवारों केसामने बड़ा ही संकट उत्पन्न हो गया है। अब आपदा प्रबंधन कमेटी ने 10 बजे की बजाय रात्रि 8 बजे से कफ्र्यू प्रभावशील करने का सुझाव शासन को भेजा है, अधिकांश लग्न सायंकालिन और रात्रिकालिन है। ऐसे में लग्न कैसे होंगे, फिर मेहमानों के लिए भी संख्या निर्धारित कर दी गई है। इससे भी लोगों की परेशानी बड़ रही है। 12 दिसंबर तक शादियों के मुर्हूत बहुत अधिक है और कोरोना संक्रमण के प्रभाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में शादी वाले परिवार क्या निर्णय करेंगे और कैसे शासन की गाईड लाईन का पालन करेंगे यह एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। लोगों को भय है कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के लोग संवेदनहिन होकर जिस प्रकार से चालानी कार्रवाई करते है और हर कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति लेने के जो नियम बनाए गए है वह भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। जनप्रतिनिधि बैठकों में बैठते है ,लेकिन उनकी उपस्थिति मात्र हाजरी भरने जैसी होती है, वे न तो सुझाव देते है और ना ही उनके सुझावों की कोई परवाह करता है, ऐसे में सामना उन्ही लोगों को करना है जिनके सामने परेशानी का संकट उत्पन्न हो गया है। शासन-प्रशासन को इसी के बीच का रास्ता निकालकर लोगों को राहत देना होगी, विशेषकर उन लोगों को जिनकी शादी की पत्रिका छप गई है, कार्यक्रम निर्धारित हो गए है। सोशल डिस्टेसिंग, मास्क का उपयोग और शासन की गाईड लाईन का पालन करवाते हुए यह मार्ग निकलेगा, ताकि लोगों में शासन के प्रति और व्यवस्था के प्रति नाराजगी कुछ कम हो सके। हिन्दुस्थान समाचार/ शरद जोशी-hindusthansamachar.in